कुमाउँनी चेली
बुधवार, 7 जनवरी 2009
बाली 'उमर' को सलाम ..........
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ये नियति है राजनीति की, चाहें या न चाहें आप, दिल्ली से लेकर कश्मीर तक, चलेगा अब एक ही वाद, जिसके आगे फुर्र मार्क्सवाद, हवा हो गया समाजव...
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