कुमाउँनी चेली
सोमवार, 16 मार्च 2009
अनपढ़ और जाहिल है मेरी माँ
›
अनपढ़ और जाहिल है मेरी माँ ज़माने भर की नज़रों को पढ़ा उसने सबसे बचा के मुझको , हीरे सा गढ़ा उसने जब मुझको गाड़ी , बँगला और ओहदा मिला जि...
15 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें