कुमाउँनी चेली

सोमवार, 16 मार्च 2009

अनपढ़ और जाहिल है मेरी माँ

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अनपढ़ और जाहिल है मेरी माँ   ज़माने भर की नज़रों को पढ़ा उसने सबसे बचा के मुझको , हीरे सा गढ़ा उसने जब मुझको गाड़ी , बँगला और ओहदा मिला जि...
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शेफाली पाण्डे
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