कुमाउँनी चेली
रविवार, 29 मार्च 2009
जीना मेरा हुआ हराम .....जबसे आया ये वेतनमान ...
›
कब हो जाती है सुबह बीत जाती है कैसे शाम जीना मेरा हुआ हराम आया जबसे वेतनमान हर कुर्सी , हर टेबल पर एक ही टेबल रोज़ है होती हर पेड़...
10 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें