कुमाउँनी चेली

रविवार, 29 मार्च 2009

जीना मेरा हुआ हराम .....जबसे आया ये वेतनमान ...

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कब हो जाती है सुबह बीत जाती है कैसे शाम जीना मेरा हुआ हराम आया जबसे वेतनमान   हर कुर्सी , हर टेबल पर एक ही टेबल रोज़ है होती हर पेड़...
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शेफाली पाण्डे
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