कुमाउँनी चेली
सोमवार, 30 मार्च 2009
मैंने भी लिखने चाहे थे प्रेम गीत .....
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मैं प्रेम गीत लिखना चाहती हूँ मैं हास्य व्यंग्य रचना चाहती हूँ और कुछ देश भक्ति की चाशनी घोलना चाहती हूँ जब मैं उठाती हूँ कलम कि कुछ ...
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