कुमाउँनी चेली
मंगलवार, 12 मार्च 2013
राम सिंह ! आराम से तो हो ?
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राम सिंह ! आराम से तो हो ? था तेरे पास कानून, अदालत तर्क - वितर्क न्याय, माफ़ी सहानुभूति पश्चाताप तुझे सजा मिलती भी तो पता नहीं कब और कितनी ?...
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