गुरुवार, 26 मार्च 2009

एक लाख की कार को कर दे मेरे हवाले ........

इतराती, इठलाती, बलखाती और लहराती 
आ गयी हो तुम सड़कों पर
दिल में मेरे फंस गयी हो
आँखों में भी बस गयी हो

बात इतनी सी में समझ ना पाऊं 
अब और सड़क कहाँ से लाऊं?
चीर दूँ आकाश को या
पाताल में सड़क बनवाऊं

पैर रखने की यहाँ जगह नहीं
पैदल चलने में होती टक्कर
जाम में पैदा होते बच्चे
मौत भी होती जाम में फंसकर 

सिग्नल में ही पौ फटती है
सिग्नल में ही गुज़रे शाम
ऐसे देश में नैनो प्यारी 
बोलो तुम्हारा है क्या काम 

5 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सही. कमस्कम मेरे शहर की तो यही हालत है.

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  2. aapki rachana shandar hai.
    des ke lakhon logon ko 'naino' se pyar hai.
    magar, naino ke liyen, acchi sadak ki darkar hai.
    aapki kavita ke samarthan me meri ye line char hai.

    yahan bhi padaharen.
    http://dskhichi.blogspot.com

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  3. नैनो सड़कों पर जब आएगी
    सड़कें रबर सी खींच जाएंगी
    जब जहां से निकल जाएगी
    सड़क पहले सी हो जाएगी।

    नैनो है जहां
    रहना है वहां।

    इस लिंक पर जाएं और नैनो है गुणकारी कार कितनी इसको जानें और अपना मन बदलें, सच्‍चाई को समझें http://www.sahityashilpi.com/2008/09/blog-post_25.html इसे यहां से कापी करें और एड्रेस बार में पेस्‍ट करें और फिर आप भी मानेंगे और यही कहेंगे कि नैनो है जहां रहना है वहां।
    नैनो है जहां चैना है वहां।

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