शनिवार, 27 मई 2017

बिना शीर्षक ----व्यंग्य की जुगलबंदी ३५


एक दिन ऐसा भी हुआ कि सारे अखबारों में से मोटे - मोटे अक्षरों में छपने वाले शीर्षक गायब हो गए | सारा दिन न्यूज़ चैनलों से ब्रेकिंग न्यूज़ फ्लैश नहीं हुई | व्हाट्सप्प से एक भी हिंसक वीडियो वायरल नहीं हुआ | 

पृथ्वी के फलाने - फलाने दिन खत्म होने की भविष्यवाणी नहीं हुई | मौसम बस मौसम की तरह आया किसी डरावने राक्षस की तरह नहीं आया कि जिसके आने से पहले चेतावनी देनी पड़े | 

गर्मी का मौसम आया तो बिना डराए हुए निकल गया | 'जल्दी ही खत्म हो जाएगा पानी' | 'प्यासे मरेंगे धरती वासी'|'और झुलसाएगी गर्मी'|'आने वाले दिनों में तापमान बढ़ता ही जाएगा' | लू के थपेड़े झेलने के लिए तैयार रहें '| 'अभी और तपेगी धरती' जैसे भयानक समाचार नहीं सुनाई पड़े | 
गर्मी बचपन के दिनों की तरह आई | जितनी बार चाहा नहा लिया | नहाने में डर नहीं लगा न ग्लानि हुई कि मैंने नहा कर धरती का सारा पानी खत्म कर दिया | बिना कैलोरी की टेंशन किये दिन में चार बार अलग - अलग किस्म के शरबत पिए | 'लू लग जाएगी' कहकर किसी पड़ोसन ने डराया नहीं और नंगे पैर मोहल्ले भर की ख़ाक छानती रही | भरी दोपहरी में दोस्तों के साथ आई स्पाय या सेवन टाइम्स का खेल खेला | गूलों में बिना गन्दगी या बैक्टीरिया की टेंशन के दल - बल के साथ दिन भर घुसे रहे | जब तक मम्मी डंडा लेकर मारने के लिए नहीं आ गयी तब तक निकले ही नहीं | रात को छत पर कई बाल्टियां पानी डालकर, दरी बिछाकर, ओडोमॉस लपेटकर, गप्पें मारकर सो गए | बिजली के आने न आने की परवाह नहीं करी | ए. सी. लगाने के बाद मीटर के दौड़ने का तनाव नहीं हुआ और चैन से नींद आई | दिन में हज़ार बार फ्रिज खोला और दिन भर बर्फ निकाल कर चूसते रहे | इंफेक्शन, खांसी, जुखाम का भय नही | सस्ती आइसक्रीम के ठेले पर टूट पड़े | गन्दा पानी, इंफेक्शन, कीटाणु जैसे शब्द हमारी डिक्शनरी से बाहर हो गए | 


जाड़े का मौसम जब आया तब आनंद ही आनंद लेकर आया  | 
किसी ने आकाशवाणी नहीं करी | जम जाएगी धरती | हिम युग आने वाला है | ब्रेन स्ट्रोक, ब्लडप्रेशर वाले रहें सावधान | जम जाएगा नलों का पानी | खाने - पीने की वस्तुओं के दाम आसमान पर | कौन बचाएगा धरती को | पूरी सर्दी किसी मौसम वैज्ञानिक ने जनता को सावधान नहीं किया | सब असावधानी से रहे और चैन से रहे | 

जाड़ा बचपन की तरह आया | एक पतला सा स्वेटर पहने हुए, न इनर , न जूते, न मोज़े, न टोपी, न मफलर, न कफ सीरप,न डॉक्टर के चक्कर लगे | नाक बहती रही, खांसी खुद ब खुद बोर होकर बिना दवाई के ठीक हो गयी | बिना हीटर और ब्लोवर के एक ही रजाई में सारे भाई - बहिन सो गए | सन टेनिंग, त्वचा का शुष्क होना, होंठ और गाल फटना इत्यादि छोटी मोटी समस्याओं की टेंशन से दूर सारा दिन धूप में खेलते - कूदते हुए गुज़ार दिया | जाड़े के मौसम में यह न खाएं, वह न पीएं ऐसा किसी डाइट एक्सपर्ट ने नहीं बताया | 

बरसात जब आई तो पानी लेकर आई | बाढ़ आएगी तो कहाँ- कहाँ विनाश होगा | बाँध टूटेंगे तो कहाँ तक के शहर डूब जाएंगे | भूस्खलन से सावधान | बह जाएगी एक दिन दुनिया |  आकाश से बरसी आफत जैसे खतरनाक बमवर्षक शब्दों की बमबारी नहीं हुई | 

बचपन की तरह बरसी बरसात | छत के पाइप के रास्ते से आने वाले गंदे पानी की बौछारों के नीचे सिर लगाकर खड़े हो गए | जिधर ज़रा सा पानी जमा हुआ देखा उधर कागज़ की नाव बनाकर तैरा दी | ज़ोर - ज़ोर से उस पर खड़े होकर छप - छप करी और एक दूसरे को उस पानी से भिगाने का सुख महसूस किया | पानी में मेंढक बनकर उछले | सांप बनकर रेंगे | चिड़िया बनकर मुँह खोलकर बारिश में खड़े हो गए |  मूसलाधार बारिश के दिन छाता और बरसाती दोनों एक साथ लेकर पड़ोस में रहने वाली मौसियों और चाचियों के घर जाकर उन्हें अचंभित किया | ओले बटोरे और उन्हें मटके में भरा | कभी हथेली में उठा कर उसके पिघलने तक इंतज़ार किया | हाथ सुन्न पड़ जाने पर हाथों को बगल में दबाकर गर्म करने की कोशिश करी |  सड़क किनारे खड़े ठेले से गोलगप्पे खाने में पेट में कभी इंफेक्शन नहीं हुआ | मच्छर, डेंगू, मलेरिया नामक बीमारियों की दुनिया से परे शरीर से खून चूसते मच्छरों को पट - पट करके मारा | 'किसने कितने मच्छर मारे' के आधार पर उस दिन का विजेता घोषित किया | 

दिन जब एक साधारण दिन की तरह आया  | 
किसी ने नहीं डराया कि तृतीय विश्वयुद्ध किस बात पर होगा ? कौन बन रहा है महाशक्ति ? परमाणु हथियार किसने कर रखे हैं तैयार ?अगर परमाणु हमला हुआ तो कहाँ तक असर होगा ? कितने लोग मारे जाएंगे ? आने वाली पीढ़ियां इस हमले की वजह से कितनी बीमारियां झेलेगी ? कितने राष्ट्र नेस्तनाबूद हो जाएंगे | किसका मिट जाएगा नामोनिशान ? कितने सालों तक तबाहियाँ होती रहेंगी ? कौन - कौन देश एक साथ लड़ेंगे ? किस - किस हथियार से युद्ध लड़ा जाएगा ? 

दिन आया तो बचपन की तरह | खेला - कूदा | खाया - पिया | दौड़े - भागे | सोए - उठे | उठे - सोए | मार - पीट | लड़ाई - झगड़ा | कट्टी - सल्ला | सुलह - सफाई | छुप्पन - छुपाई | सुबह रंगोली | शाम चित्रहार | गुड़िया की शादी | अपनी रसोई | छोटी - छोटी पूरियां | गाना - बजाना | नाच | मम्मी की साड़ी और लिपस्टिक | पापा का चश्मा | नानाजी की लाठी | नानी की कहानियां | रामलीला का खेला खेलते दिन बीत गया |  

रात को मैंने बच्चों से पूछा, '' आज दिन भर में कुछ भी डरावना नहीं हुआ बच्चों | किसी अखबार मे रेप, दुष्कर्म, अपहरण, आतंकवाद, हत्या की खबर नहीं है | सारे चैनल सुनसान पड़े हैं | आज तुम परियों की कहानी सुनना चाहोगे ?
 

रविवार, 21 मई 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी ३२ - हवाई चप्पल

हवाई चप्पल ----

एक राम किशोर हैं | अस्सी साल से ऊपर के रिटायर्ड मास्टर | झुकी हुई कमर | कमज़ोर नज़रें | दुबले इतने कि ज़ीरो फिगर वाली लड़कियां शर्मा जाएं | वे इंसान के खाली बैठने को दुनिया का सबसे बड़ा पाप मानते है | 

राम किशोर की आवश्यकताएं बेहद सीमित हैं | रोटी, कपड़ा और मकान के बाद सबसे आवश्यक जिसको मानते हैं वह है हवाई चप्पल | अगर घर के अंदर कोई नंगे पैर चलता दिख जाए तो उसकी शामत आ गयी समझो | पहले उससे नंगे पैर चलने का कारण पूछा जाएगा | अगर उसके मुंह से ' चप्पल नहीं मिल रही ' जैसा कुछ निकल गया तो टॉर्च लेकर चप्पा - चप्पा छान मारेंगे | किसी की चप्पलें खो जाएं तो उनका चेहरा खिल जाता है | खोई हुई चप्पलों को ढूंढने के लिए खाना - पीना छोड़ तक छोड़ देते हैं | चप्पल खोज के सघन अभियान के दौरान बीच - बीच में आकर लेटेस्ट अपडेट भी देते रहते हैं  -

''सारा घर छान मारा'' | 
''हर कोने में देख लिया''
''बिस्तर के नीचे डंडा डालकर भी देखा'' | 
''सोफे के नीचे तक ढूंढ लिया'' | 
''कहीं नहीं मिली''|  
''आकाश - पाताल एक कर दिया''|  

कई घंटों की मशक्कत के बाद अंततः उन्हें चप्पल ढूंढो अभियान में सफलता मिल ही जाती है | चप्पलें शू रैक में करीने से लगी हुई बरामद होती हैं | ऐसा कभी कभार ही होता है कि चप्पलें अपनी निर्धारित जगह पर रखी हुई हों | 

कभी उनकी चप्पल इधर - उधर हो गयी तो भौंहों में बल डालकर गुस्से में कहते हैं ''लगता है कोई उठा ले गया | घर में कौन - कौन आया था'' ?

बच्चे-----
''ही ही ही,  पापा आपकी चप्पल कौन उठाएगा''?
''आपकी चप्पलों की हालत देखकर तो उसका मन करेगा कि आत्महत्या कर ले'' | 
''अगर आत्महत्या नहीं कर पाया तो अपनी चप्पल छोड़ कर खुद नंगे पैर चला जाएगा'' |
''ग्लानि से भर कर चोरी ही छोड़ देगा'' |  
पत्नी -----
''सब चोर ही आते हैं इस घर में '' 

तरह - तरह के मज़ाक भी उन्हें उनके उद्देश्य से विचलित नहीं कर पाते | 

राम किशोर की चप्पल भी इतनी जबरदस्त होती है कि देखने वाला देखते रह जाए | घिसते - घिसते असली रंग दिखने लगता है | फीते टूट जाते हैं तो पहले खुद फीतों को सिलने की कोशिश करते हैं | मोटी सुई और धागा माँगा जाता है | घंटों तक जद्दोजहद करने के बाद जब किसी भी तरह से सिल नहीं पाते तो मोची का पता पूछते हैं |  

बच्चे ----
'' पापा मोची ने मना कर रखा है कि इस चप्पल को लेकर मत आना ''| 
''अगर आप इस चप्पल को लेकर गए तो वह अपने आपको आपको गोली मार देगा | 
'' वह अपना धंधा छोड़ देगा ''| 
पत्नी -----
'' क्या हो गया है आपको ? कितने दिन चलेंगी ये ?नई चप्पलें क्यों नहीं खरीद लेते''?

राम किशोर हार नहीं मानते,'' तुम लोग बहाने बनाते हो | सब के सब निकम्मे हो | मैं खुद ही ले जाऊँगा अपनी चप्पल ''| 

वे झुकी हुई पीठ और टूटी हुई चप्पलों को लेकर नुक्कड़ के मोची के पास जाते हैं | लौटते समय उनकी चाल में गज़ब की अकड़ आ जाती है | झुकी हुई पीठ सीधी हो जाती है | बहती हुई बीमार आँखों में चमक देखते ही बनती है |
   
''तुम लोग झूठ बोलते थे | मोची ने फटाफट दूसरे फीते डाल दिए | उसने कहा कि टाँके नहीं लग पाएंगे तब मैंने कहा कि अगर ऐसा है तो फिर फीते ही बदल दो | वह तो बहुत ही भला इंसान निकला | उसने बस दस ही रूपये लिए | कहने लगा ''आजकल हवाई चप्पलों में फीते डलवाता ही कौन है ? महीने में एक - आध बार ही ऐसे ग्राहक आते हैं ''| 

बच्चे ---
''आपको सम्मानित नहीं किया उसने''?
'' ऐसा कहकर वह आपकी मज़ाक बना रहा था''| 
'' आपका फोटो खींचकर सोशल मीडिया में अपलोड करेगा ''| 
पत्नी --
'' पता नहीं क्या सुख मिलता है इन्हें लोगों को ऐसा दिखाकर'' | 

असंख्य टाँके लगने और दो - तीन बार फीते बदलने के बाद जब तला इतना घिस जाता है कि चप्पल आधी रह जाती है तब वे दानवीर कर्ण बनकर उन्हें बाहर रख देते हैं ''कोई गरीब ले जाएगा ''| 

बच्चे ----

''बिना तले की चप्पलें पहिनने वाला गरीब इस दुनिया में एक ही है'' |
''उसे चप्पल मत कहिये पापा'' |
''लोग मज़ाक उड़ाते हैं पापा'' | 
पत्नी -----
''तेरे पापा शौक है अपने को गरीब दिखाने का'' |

''मैं क्या किसी की मज़ाक से डरता हूँ ? और चप्पल बिलकुल ठीक है अभी | आराम से छह महीने और चल सकती है | तुम्हारे जैसे लोगों की फ़िज़ूलख़र्ची ने देश को बर्बाद कर दिया है'' |  

ऐसा नहीं है कि राम किशोर अपनी उन हद दर्ज़े तक घिसी चप्पलों से फिसलते नहीं हैं | फिसलते हैं और तुरंत सम्भल जाते हैं | इकहरे शरीर और पैंतालीस किलो वजन वाले अपने शरीर पर उनको काफी घमंड है | उनको फिसलता देखकर घरवालों की लॉटरी लग जाती है | 

बच्चे ----
'और पहनो घिसी चप्पल ''| 
''अशर्फियों पर लूट और कोयलों पर मुहर ''| 
''किसके लिए बचा रहे हैं पैसा ''?
''अभी कुछ हो जाता तो हज़ारों की चपत लग जाती'' | 
पत्नी ------
''इनसे तो कुछ कहना ही बेकार है ''

वे तुरंत बचाव की मुद्रा अख्तियार कर लेते हैं ''कमज़ोरी के कारण चक्कर आ गया था | चप्पल में कोई खराबी नहीं है''| 

उनकी पत्नी हर छह महीने में शोरूम से नई चप्पल खरीदती है | चल कर भी देखती है | अजीब सी बात है कि कोई भी नई चप्पल एक या दो बार ही पहिन पाती है | 

''अच्छी नहीं है, बेकार है, जबरदस्ती भिड़ा दी दुकानदार ने | शोरूम की तड़क - भड़क के चक्कर में आ गए | आगे से चुभ भी रही है, दुकान में तो ठीक ही लग रही थी, घर आकर पता नहीं क्या हो गया '', कहकर काम वाली को दे देती है | उनके पैरों में नई चप्पलें देखकर काम वाली समझ जाती है कि एक - दो हफ्ते के अंदर उसे फिर से नई चप्पलें मिलने वाली हैं | 

पत्नी नई से नई चप्पलों में भी फिसल जाती है | दो बार एड़ी में बाल आ चुका है | ऐसे में वे खुद पर गर्व करते हैं, ''देखा तुमने ! मैं हमेशा कहता हूँ कि सारा खेल दिमाग का है | दिमाग संतुलित रहे तो चप्पलें भी संतुलित रहती हैं, चप्पलों के घिस जाने का फिसलने से कोई ताल्लुक नहीं है ''| 
 
लाख दलीलों के बावजूद पत्नी की आँखों में खटकती हैं उनकी हवाई चप्पलें | गुस्से की मात्रा जब बहुत बढ़ जाती है तो वे पति के लिए नई ब्रांडेड चप्पलें खरीद कर ले आती है | राम किशोर गंदा सा चेहरा बनाकर उन्हें अलमारी के ऊपर रख देते हैं | 

''मैंने क्या करना है नई चप्पलें पहिनकर | बेटा पहिनेगा | जब आता है चप्पलें ढूंढता रहता है'' | अपने लिए आई हुई सारी नई चीज़ें और उपहार वे अलमारी के ऊपर रख देते हैं | बनियान, रूमाल, मोज़े, शर्ट, कुर्ते, स्वेटर सब | 

ब्रांडेड पहिनने वाला बेटा उस ओर नज़र भी नहीं डालता | सालों साल वे वस्तुएं उसी अवस्था में पडी रहती हैं | 

चप्पलों के मामले में बेटा उनका भी उस्ताद है | जो चप्पल उसके लिए रखी जाती है उसे छोड़कर सब में पैर डाल लेता है | दो अंगुलिया फँसाई, निकल पड़ा, बाकी पैर बाहर रहे या अंदर उसे कोई फर्क नहीं पड़ता | 

हर दीवाली में उनकी चप्पलों पर ही सबकी नज़र रहती है कि कैसे सफाई के नाम पर उनको बाहर किया जाए | दीपावली के सफाई वाले दिनों के दौरान वे अत्यंत चौकन्ने हो जाती हैं | वे अपनी चप्पलों के आस - पास ही मंडराते रहते हैं | जैसे ही उनकी चप्पलों को कबाड़ के सामान के साथ फेंका जाता है, वे बिजली की गति से दौड़ कर आते हैं और हवाई चप्पलों को उठा ले जाते हैं | 

''मेरी मेहनत की कमाई की है''|  
''खून - पसीना लगता है एक -एक पैसा कमाने में'' |  
 
खून - पसीना उनका मनपसंद जुमला है | वे बदल - बदल कर दोनों जुमलों का उपयोग करते हैं | ज़्यादा गुस्सा आने पर खून - पसीना का उपयोग करते हैं | 

राम किशोर को शादी - विवाह या अन्य किसी सामजिक कार्यक्रम में जाना पसंद नहीं आता, क्योंकि तब उन्हें घरवालों के भीषण दबाव का सामना करना पड़ता है जिसके अंतर्गत उन्हें अपनी प्रिय हवाई चप्पल उतार कर सेंडिल या जूते पहनने पड़ते हैं, जिससे बहुत तकलीफ होती है | इससे बचने के लिए उन्होंने सालों से कहीं भी जाना बंद कर रखा है | 

बच्चे चाहते हैं कि उनके पिता कहीं घूमने - फिरने के लिए जाएं | बची हुई ज़िंदगी में कम से कम एक बार हवाई यात्रा का आनंद उठा लें | 
 
बच्चे ----
'' पापा एक बार हवाई जहाज में बैठ जाओ न हमारे कहने से ''| 
''ऊपर से नीचे की दुनिया को देखना पापा | बड़ा मज़ा आता है'' | 
''पापा प्लीज़ जाइये ना, कभी तो हमारा कहना मान लिया करिये ''| 
पत्नी ----
''चलिए हम दोनों साथ घूमने चलते हैं | जवानी में तो तुमने घुमाया नहीं, अब बच्चे टिकट भी करा के दे रहे हैं, अब तो चले चलो  ''| 
राम किशोर ----
''अब मैं बस ऊपर वाले के हवाई जहाज में ही बैठूंगा '' कहकर ऊपर की ओर उंगली उठा देते हैं | 

ऐसी स्थिति में जब पी.एम. अपने 'मन की बात' में कहते हैं कि उनका सपना है कि 'हवाई चप्पल पहिनने वाले भी एक दिन हवाई जहाज में बैठ सकेंगे' तब विश्वास नहीं होता कि राम किशोर अपनी हवाई चप्पलों के साथ हवाई जहाज में बैठने के लिए राज़ी हो पाएंगे |   
  

बुधवार, 10 मई 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी - 'कड़ी निंदा '


वे बन्दूक की गोली के सामान फुल स्पीड में आए | गुस्से से लबालब भरे हुए | मिसाइल की तरह मारक | तोप की तरह गरजने को तैयार | बम की तरह फटने को बेकरार |

''जब देखो तब कड़ी निंदा, भर्त्सना, विरोध | सुन - सुन कर कान पक गए हैं'' | 

''फिर क्या करना चाहिए उन्हें'' ?

''करना क्या है ? हमला करें सीधे - सीधे | युद्ध की घोषणा करें | मुंह छुपा कर कब तक बैठेंगे | कब तक सहते रहेंगे ? सहने की भी हद होती है | दुनिया थूक रही है हम पर | अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन यह देश हाथ से चला जाएगा | मुझे तो कहीं मुंह दिखाते शर्म आती है'' |

''लेकिन अभी तो आप मल्टीप्लेक्स से 'बाहुबली' देख कर आ रहे हैं कई लोगों ने आपका मुंह देख लिया होगा'' |

''देखिये बात को घुमाइए नहीं | आप ही बताइये कि कड़ी निंदा से क्या बिगड़ रहा है पाकिस्तान का'' ? 

''तो क्या करे सरकार ? विकल्प सुझाइये''| 

''युद्ध | हाँ ! अब यही एकमात्र विकल्प बचा है | पता नहीं इतनी देरी क्यों हो रही है ? युद्ध हो गया होता तो अभी तक तो फैसला हो भी गया होता'' | 

''युद्ध बहुत कड़ा शब्द नहीं हो गया'' ?

''नहीं बिलकुल नहीं | युद्ध से कम अब कुछ स्वीकार नहीं होगा, हमारे गोला बारूद किस दिन काम आएँगे ? कब से युद्ध भी नहीं हुआ है, मैं कहता हूँ कि बहुत जल्दी जंग लग जाएगा हमारे अस्त्र - शस्त्रों में | 

''लेकिन युद्ध से किसी समस्या का समाधान नहीं होता | युद्ध के बाद भी बातचीत करनी पड़ती है''|  

''न हो समाधान | कम से कम कलेजे पर ठंडक तो पड़ेगी | हमारे ही मर रहे हैं हमारे ही कट रहे हैं | उनके भी इतने ही मरने चाहिए तब जाकर मज़ा आएगा'' | 

''यह ठीक कहा आपने | मज़ा चाहिए दरअसल आपको'' | 

''मेरे कहने का वह मतलब नहीं है | मैं तो यह चाहता हूँ कि पकिस्तान को ज़ोरदार सबक सिखाना चाहिए | मैं अगर पी.एम. होता तो कबका हमला कर दिया होता'' | 

''तभी तो आप पी.एम.न हुए'' | 

''क्या मतलब'' ?

''कुछ नहीं | अच्छा यह बताइये कि आपके अंदर वीरता की भावना इतनी कूट - कूट कर भरी है | मुझे लगता है कि आपके घर में ज़रूर कोई फ़ौज में होगा'' | 

''नहीं जी | मेरे दादाजी बहुत बड़े ज़मींदार थे | पिताजी बैंक में थे | एक भाई एल.आई.सी.में है और दूसरा सरकारी विभाग में क्लर्क है''| 

''तब तो ज़रूर आपके बच्चे फ़ौज में जाना चाहते होंगे'' | 

''कैसी बात कर रही हैं आप? मेरा एक ही बेटा है | वह भला क्यों जाएगा फ़ौज में ? हाँ कभी - कभी कहता है लेकिन हम नहीं चाहते कि वह फ़ौज में जाए | एक बार उसने चुपके - चुपके फॉर्म भरा भी था लेकिन हमने उसका कॉल लेटर छुपा दिया था | उसे आज तक यह पता नहीं है कि कॉल लेटर क्यों नहीं आया | क्या कमी है उसके लिए ? उसे तो मैं इंजीनियर बनाऊंगा | मैंने उसके लिए बहुत सारा पैसा जमा कर रखा है | डोनेशन भी दे दूंगा'' |  
 
''आप अपने बेटे का कॉल लेटर छुपा सकते हैं और चाहते हैं कि किसी और के बेटे युद्ध करें और मारे जाएं ? फौजियों के परिवार नहीं होते क्या'' ?

''अजी उनका काम है देश की सेवा करना | जैसे हम देश के अंदर सेवाएं देते हैं, वैसे ही वे देश की सीमा पर अपनी सेवाएं देते हैं ''| 

''लेकिन आपके काम में जान का खतरा नहीं है'''| 

''अजी यह क्या बात हुई ? उनको उनकी जान का मोटा पैसा मिलता है | अभी हमारे ऑफिस में काम करने वाले चपरासी का बेटा शहीद हुआ है | मालूम है कितना पैसा मिला उनको''?

''कितना''?

''पूरे पचास लाख | साथ में पैट्रोल पम्प | बच्चे को सरकारी नौकरी | पढ़ाई मुफ्त | फ़ौज की नौकरी तो बहुत ही मज़े की है | ज़िंदगी भर कैंटीन की सुविधा | इलाज फ्री | वैसे वे करते भी क्या हैं ? साल भर तो मक्खी मारते हैं | फ्री की दारु उड़ाते हैं | मुर्गा खाते हैं | कभी - कभी ही तनाव के दिन होते हैं इनके | इनके तो मरने में भी लॉटरी लग जाती है''| 

''आप नहीं चाहते कि आपकी भी लॉटरी खुले ?आपके बेटे को भी इतना सब मिल जाता | आपने उसका कॉल लैटर छुपा कर ठीक नहीं किया | भेजना चाहिए था उसे फ़ौज में'' | 


''आपको इतनी तकलीफ क्यों हो रही है ? आपके घर में भी तो कोई नहीं है फ़ौज में''| 

''आप संजय को नहीं जानते होंगे''| 
''नहीं''|  
''आप प्रमोद को भी नहीं जानते होंगे''|  
''नहीं''|  
''ये हमारे स्कूल के बच्चे थे | इंटर पास करते ही फ़ौज में भर्ती हो गए थे | दोनों बहुत होशियार थे | प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण | घर से बेहद गरीब थे | सुबह - सुबह दस किलोमीटर की दौड़ लगाते थे | इंजीनियर बन सकते थे लेकिन घर में खाने के लिए बहुत मुश्किल से हो पाता था | एक दिन भर्ती में गए और चुन लिए गए | घर में खुशी की लहर | भरपेट खाने के लिए अन्न आने लगा | देखा - देखी गाँव के और लड़के भी तैयारी करने लगे | संजय पिछले साल शहीद हो गया | शादी हुए तीन ही महीने हुए थे उसके | गर्भवती थी उसकी पत्नी | आपके शब्दों में उसकी लॉटरी लग गयी थी | अब सारी ज़िन्दगी उसे एक विधवा के रूप में अपने बच्चे के साथ अकेले गुज़ारनी है | आपको पता नहीं होगा कि गाँव देहात में ऐसी ज़िंदगी गुज़ारना कितना मुश्किल होता है | दूसरा लड़का प्रमोद है | दुनिया भर की मनौतियों के बाद पैदा हुआ | छह बहिनों का इकलौता भाई | उसके पिता बहुत पहले ही शराब पी कर ख़त्म हो गए थे | आजकल उसके घर वालों की भी ऐसे ही बम्पर लॉटरी लगी है | उसकी माँ ने इस लॉटरी निकलने की खुशी में खाना - पीना छोड़ कर प्राण त्याग दिए | लोग लॉटरी निकलने पर तरह - तरह से मज़े उड़ाते हैं, और बताइये उन्होंने अपनी जान ही दे दी''| 

''आप तो देशद्रोहियों के जैसी बातें कर रही हैं | आपको शर्म आनी चाहिए | आपके जैसे लोगों को हिंदुस्तान में रहने का कोई हक नहीं है | मैं आपके`इस रवैये की कड़ी निंदा करता हूँ ''| 

''मैं आपके इस देशप्रेम की निंदा करती हूँ | और आपके इस युद्ध करने के शौक की कड़ी निंदा करती हूँ''|  


रविवार, 7 मई 2017

लाल बत्ती उतरे हुए नेता का साक्षात्कार ---


कैसा लग रहा है लाल बत्ती के जाने के बाद ------
लगना कैसा है जी ? हम देख रहे हैं कि हमें लाल बत्ती के उतरने की तकलीफ कम है और जनता, मीडिया को खुशी ज़्यादा है | जनता हमारी तकलीफों से खुश होती है यह तो हम पहले से ही जानते थे | इसीलिये हम भी जनता की तकलीफों से दुखी नहीं होते थे | जनता की असलियत अब खुलकर सामने आ गयी है इसीलिये अच्छा ही लग रहा है | कहते भी हैं कि मुसीबत के समय ही अपने - परायों की पहचान होती है | 


पहली बार जब लाल बत्ती मिली थी तब कैसा लगा था ?
उस समय की याद दिला कर ज़ख्मों पर नमक छिड़क दिया आपने | फिर भी बताते हैं | जब पहली बार लाल बत्ती लगी गाड़ी मिली थी तो लगा था ''मैं ही मैं हूँ दूसरा कोई नहीं ''| सड़कों पर मेरी गाड़ी गुज़रती थी तो जनता अचकचा जाती थी | सब दाएं, बाएं खड़े हो जाते थे | जो जहाँ खड़ा रहता था वहीं चिपका रह जाता था | लोग गाड़ी के अंदर झांकते थे | उनकी आँखों में ऐसा भाव होता था जैसे कि मैं किसी दूसरे ग्रह का प्राणी होऊं | उन्हें क्या खुद मुझे भी ऐसा लगता था | लोग सिर झुका लेते थे | हाथ जोड़कर खड़े हो जाते थे | ऐसी फीलिंग आती थी जैसे कि पुराने ज़माने में राजा लोग अपने रथ पर बैठ कर सड़क से गुज़र रहे हों और जनता पुष्प वर्षा कर रही हो | जयकारा लगा रही हो | 

लाल बत्ती से क्या फायदा महसूस किया आपने ?
अजी एक फायदा हो तो गिनाऊँ | फायदे ही फायदे थे | लोग पहले लाल बत्ती लगी गाड़ी को देखते थे, फिर लाल पट्टी उसके बाद गाड़ी के अंदर झाँक कर हमारी शक्ल के साक्षात दीदार किया करते थे | अखबार और टी वी के अलावा इसी लाल बत्ती गाड़ी के अंदर जनता हमारे दर्शन करती थी | हमारे चेहरे टी.वी. और अखबार से कितने अलग दिखते हैं या बिलकुल उस जैसे ही दिखते हैं यह बात गर्व के साथ औरों को भी बताती थी | हममें से कुछ को लाल बत्ती वाले पद मिलते थे तो कुछ के लिए लाल बत्ती वाले पद बनाए जाते थे | ऐसे असंख्य पदों की जानकारी से जनता का सामान्य बढ़ता था | रात को जब लाल बत्ती लगी गाड़ियां सड़कों पर दौड़ती थीं तो स्ट्रीट लाइट की ज़रुरत नहीं रहती थी | रात को होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आ गई थी | इस पर किसी ने गौर नहीं किया | 

क्या किया लाल बत्ती का ?
क्या करते ? आप ही बताइये | इतने सालों से जिसे गाड़ी में मुकुट की तरह सजाए रखा उसे फेंक कैसे देते ? अपने बेड रूम में लगा दी है नाइट बल्ब के बदले | कम से कम एहसास ही बना रहे कि कभी हम वी.आई.पी.थे | बिना लाल बत्ती के घरवाले भी आम आदमी वाली नज़र से देखने लगे हैं | 

क्या लगता है किसका षड्यंत्र होगा इसके पीछे ?
आप ही बताइये किसका होगा ? उसी का जो हमें चुनती है | हाँ उसी जनता का किया धरा है सब | क्या बिगाड़ रही थी हमारी छोटी सी लाल बत्ती किसी का ? बताइये | हम किसके सेवक हैं ? जनता के ही ना ! उसकी सेवा करने में हमें लाल बत्ती गाड़ी से आसानी हो जाया करती थी | जाम में नहीं फंसना पड़ता था | लोग हकबकाकर रास्ता दे देते थे | हमारा भला क्या लाभ था बताइये ? लेकिन जनता को कौन समझाए ? जनता को कितनी सुविधाएं मिलतीं हैं हमने तो कभी ऐतराज़ नहीं किया | 

जनता से कुछ कहना है ?
मैं जनता से यही कहना चाहता हूँ कि हमने उसे इतने आश्वासन दिए और उसने हमें उन आश्वासनों के बदले क्या दिया ? अभी भी सुधरने का समय है वरना एक दिन ऐसा भी आएगा कि भारत - भूमि नेताओं से खाली हो जाएगी | अकाल पड़ जाएगा | वी.आई.पी.मात्र अटैचियों पर लिखा रहेगा | हाथ जोड़ेगी जनता लेकिन कोई नेता बनने के लिए तैयार नहीं होगा | लाल बत्ती का मुवावज़ा भी काम नहीं आएगा |  

कभी याद आती है लाल बत्ती की ?
जब जनता हमारी गाड़ी देखकर मुंह फेर लेती है तब उन सुनहरे दिनों की याद आ जाती है | पहले हम उसकी उपेक्षा करते थे अब वह हमें देख कर भी अनदेखा करती है  हमने तो अब जान - बूझकर जनता की ओर देखना शुरू कर दिया है कि शायद वह हमें पहचान कर थोड़ी श्रद्धेय हो जाए | लोग पहचान लेते हैं लेकिन श्रद्धेय नहीं होते बल्कि उपहास सा उड़ाते हैं | समय - समय का फेर है | कभी लाल बत्ती जनता पर तो कभी जनता लाल बत्ती पर सवार हो जाती है | 

सरकार से नाराज़गी है ?
अब नाराज़गी से किसी को कोई फर्क पड़ता नहीं है | वैसे हम तो अपने आप को बहू समझते हैं | यह सास पर निर्भर करता है कि वह अपनी बहू को किस रूप में देखना चाहती है ? कुछ सासें चाहती हैं कि उसकी बहुएं सोलह - श्रृंगार में रहें | ज़ेवरों से लक - दक करती रहें, ताकि अन्य सासों के सीने पर सांप लोटे | कुछ सासों का सोचना अलग होता है कि बहू इतने ज़ेवरों से लदी रहेगी तो लोग क्या कहेंगे ? नज़र लगाएंगे | चोर पीछा करेंगे | इस समय हमारी सास नहीं चाहती है कि हम लाल बत्ती से सजे - धजे रहें | हो सकता है कल दूसरी सास आए और हमें अपने हाथों - लाल बत्ती का गहना पहनाए | इस समय बहुमत मिलने के कारण हम रूठ नहीं सकते वरना तो लालबत्ती खुद चलकर हमारे दरवाज़े पर आ जाती | मैं तो जनता से अपील करूंगा कि अगली बार किसी को बहुमत न दे | बहुमत हमारे लिए अभिशाप है | बहुमत नहीं होता है तो हर किसी को लाल बत्ती देनी पड़ जाती है | हमें तो बहुमत ने मारा है | 

क्या लाल बत्ती उतरने का स्वास्थ्य पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है ?
ऐसा है कि लाल बत्ती मनुष्य के रक्त में पाए जाने वाले वाले हीमोग्लोबीन की तरह होती है | हीमोग्लोबीन कम होने से जब इंसान तकलीफ में आ जाता है तो लाल बत्ती के ख़त्म होने से नेता तकलीफ में आएगा कि नहीं ? हमने हँसते - हँसते लाल बत्ती उतारी लेकिन हम जानते हैं कि हमारा दिल कितना रो रहा था | रातों की नींद उड़ गयी | नींद की गोली की डोज़ डबल हो गयी है | अपनी तो कोई बात नहीं | बत्ती मिलेगी तो उतरेगी भी और जब उतरेगी तो फिर से मिलेगी भी | मुझे दुःख तो अपनी इस गाड़ी को देखकर होता है | मोहल्ले वाले बच्चे तक हमारी गाड़ी को देखकर रास्ता नहीं देते | पहले लोग गाड़ी छूने की सपने में तक नहीं सोचते थे और अब इसके जिस्म पर जहाँ - तहाँ खरोंच पडी हुई दिख जाती है | जाम में फंस गयी तो घंटों तक फंसी रह जाती है | बत्ती क्या उतरी इसकी शान उतर गयी लगती है | गम में डूबकर पेट्रोल ज़्यादा पीने लगी है | चलते - चलते अचानक रुक जाती है | ब्रेक मारते समय झटका देती है | कहीं पर भी पंचर हो जाती है | हॉर्न बजाने पर कई बार मुझे करंट लग चुका है | मुझे कुछ नहीं हुआ लेकिन इसको गहरा सदमा लग गया है | 
   
भविष्य के नेताओं को कोई सन्देश देना चाहेंगे ?
ज़रूर देना चाहूंगा | अब जो लोग राजनीति में आना चाहते हैं उन्हें आगाह करना चाहता हूँ | अभी लाल बत्ती बंद हुई है | कुछ दिनों बाद लाल पट्टी का नंबर आएगा | फिर केंटीन के सस्ते खाने पर गाज गिरेगी | पेंशन - भत्ते ख़त्म हो जाएंगे | सिक्योरिटी छीन ली जाएगी | मुफ्त उड़ान और यात्रा पर बैन लगेगा | सरकारी आवास छिनेगा | पाई - पाई पर नज़र रखी जाएगी | सी.सी.टी.वी. के माध्यम से प्रत्येक हरकत कैद करी जाएगी | उनमें और आम जनता के बीच कोई फर्क नहीं रह जाएगा | इसीलिये अभी भी समय है कोई और काम - धंधा पकड़ लो | हम तो फंस चुके हैं और कोई यहाँ आने से पहले सौ बार सोचे | 

रविवार, 23 अप्रैल 2017

लाल बत्ती की अभिलाषा -

लाल बत्ती की अभिलाषा -


चाह नहीं दीवाली की 
लड़ियों में गूँथा जाऊँ | 

चाह नहीं शादी के मंडप में 
लग कर झूठी शान बढ़ाऊँ | 

चाह नहीं डार्क रूम में लग 
फोटुओं को धुलवाऊँ |

चाह नहीं डी.जे.में फिट हो 
हे हरि! सबको नाच नचाऊँ|

मुझे खोल लेना, छत से आली !   
उस पथ पर देना फेंक

रेस कोर्स पर शीश नवाने 
जिस पथ जाएं वी.आई.पी.अनेक | [ स्व. माखनलाल चतुर्वेदी से क्षमा प्रार्थना ]


सोमवार, 17 अप्रैल 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी -28


व्यंग्य की जुगलबंदी -28 
मूर्खता -----------------------------
मूर्खता का समाजशास्त्रीय अध्ययन------- 
मूर्खता के अपने - अपने प्रतिमान हैं | मूर्खता कब होशियारी मे बदल जाए और होशियारी कब मूर्खता में गिनी जाने लग जाए, कहा नहीं जा सकता जा | 
इन दोनों को देखिये | इनके माता - पिता ने जिसको पसंद किया इन्होने आँख मूंदकर शादी कर ली | दोनों ने मूर्खों की तरह ने ज़िंदगी भर घर - गृहस्थी में खुद को झोंक दिया | बच्चे पैदा किये | उन्हें पढ़ाया - लिखाया | काबिल बनाया | इस औरत ने शादी के बाद नौकरी छोड़ी और पूरा समय बच्चों की परवरिश की | अपने लिए कुछ सोचने  का मौका इन दोनों को मिला ही नहीं | अब ये बूढ़े हो गए हैं | इनकी इच्छा है कि दोनों बच्चों की शादी करके गंगा नहा लें | इन्हें नहीं पता कि समय कितना बदल गया है | लड़की ने साफ़ - साफ़ मना कर दिया है कि उसके लिए लड़का कतई न ढूँढा जाय | वह अपनी माँ की तरह शादी करके मूर्खता नहीं करेगी | जब तक उसका मन करेगा वह लिव इन में रहेगी, उसके बाद मन हुआ तो कोई बच्चा अनाथालय से गोद ले लेगी वरना ऐसी ज़िंदगी भी कोई बुरी नहीं | 
इनका इकलौता बेटा भी कुछ ऐसे ही विचार रखता है | शादी - विवाह की मूर्खता में वह विश्वास नहीं रखता |  माँ - बाप की मूर्खता को वह नहीं दोहराएगा | शादी का नाम सुनते ही उसे करंट लग जाता है | शादी करके रोज़ झगड़ा करने से अच्छा तो वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ खुश है | गर्लफ्रेंड, जो किसी और की पत्नी है, लेकिन खुश इसके साथ है | लड़के का कहना है कि वह पैंतालीस साल के बाद सेरोगेसी से बाप बनेगा | माता - पिता से उसका आग्रह है कि वे पोता - पोती को गोदी में खिलाने की मूर्खता वाला सपना देखना छोड़ दें | 

इस मूर्ख आदमी ने सारी उम्र ईमानदारी से काम किया | किराए के मकान में उम्र काट दी | अपनी झोंपड़ी तक नहीं बनवा पाया | पहली तारीख के इंतज़ार में जीवन गुज़ार दिया | लड़कियों की शादी भारी क़र्ज़ लेकर करी | सारा फंड लड़के को सैटल करने में लगा दिया | तमाम तरह के कोर्स करने के बाद लड़के को बहुत मुश्किल से एक मामूली नौकरी मिल सकी | किसी तरह से लड़के का गुजर - बसर चल रहा है | यह होशियार बेटा बात - बात पर बाप की मूर्खता को पानी पी - पी कर कोसता है और उनके सिद्धांतों को लानत भेजता है | 
इस मूर्ख आदमी की जगह पर जो नौकरी पर आया है वह तो लगता है कि पैदा ही होशियार हुआ था | सरकारी नौकरी में तनख्वाह को छूना उसकी नज़र में मूर्खता है | वह मानता है कि किराये के मकान में तो गधे रहते हैं | तनख्वाह की रकम से ज़रुरत मंदों को भारी ब्याज पर क़र्ज़ देता है | दो बेटे हैं, दोनों को इंटर नेशनल स्कूल में डाल रखा है | हफ्ते में एक दिन सपरिवार बाहर खाना खाता है | इसके परिवार को सुखी परिवार की श्रेणी में रखा जा सकता है |  

यह देखिये इस मंद बुद्धि डॉक्टर को | इसने सारी उम्र मरीज़ों की सेवा करी | अच्छे से अच्छा इलाज मुहैया करवाया | रात को भी इमरजेंसी में मरीज़ों को देखता था | इसको देख लेने मात्र से मरीज़ आधे ठीक हो जाते थे | इसने फीस भी इतनी ही रखी थी जिससे क्लीनिक का खर्चा चल जाए | क्लीनिक हाईटेक न होकर के साधारण सा एक कमरा था, जिसमें दो कुर्सियां ,एक मेज़ और एक सीलिंग फैन लगा हुआ था | सैम्पल की दवाएं मुफ्त में बाँट देता था | इसने कभी मरीज़ या उसके घरवालों को धोखे में नहीं रखा | जिसके बचने की उम्मीद होती थी उसके पीछे पूरा इलाज झोंक देता था और जिसके बचने की उम्मीद नहीं होती उसे साफ़ लफ़्ज़ों में मना कर देता था | एक दिन ऐसे ही साफ़ लफ़्ज़ों में स्थिति बताने पर मरीज़ के घरवालों ने इसके हाथ - पैर तोड़ दिए | अब यह चलने - फिरने से लाचार बिस्तर पर पड़ा रहता है और बीबी - बच्चों की हिकारत से भरी नज़रों को रात - दिन झेलता है | 
इस विशेषज्ञ डॉक्टर को भी देखिये | यह मरीज़ों को सम्मोहित कर देता है | मरीज़ बुखार का इलाज़ करवाने आता है और यह मीठी - मीठी बातें करके उनके सारे टेस्ट करवा लेता है | ई.सी.जी.,एक्स रे, किडनी, लीवर, हार्ट सबकी जाँच करवाने के बाद ही साँस लेता है | इसके क्लीनिक की साज- सज्जा पाँच सितारा होटल को मात देती है | मरीज ए. सी. का लुत्फ़ उठाता है जिसका बिल उसी की जेब से जाता है | इस अक्लमंद डॉक्टर की पूरी कोशिश रहती है कि मरीज़ को छींक भी आए तो उसे अस्पताल में दो दिन एडमिट किये बिना जाने न दिया जाए | मरीजों की जेब खाली करवाकर उसने अपना छोटा सा क्लीनिक चौमंजिला अस्पताल में बदल दिया है | अगर मरीज लाते - लाते मर जाता है तब भी वह चार दिन तक उस डेड बॉडी को वेंटिलेटर पर रखता है और लाखों रूपये वसूल करके ही परिजनों को सौंपता है | चप्पे - चप्पे पर सुरक्षा - गार्ड तैनात होने से कोई चूं भी नहीं कर पाता | 

यह देखिये इस मूर्खाधिराज वकील को | यह अपने मुवक्किलों की मुकदमा निपटाने में हर संभव मदद करता है | ऐढी - चोटी का ज़ोर लगाकर न्याय दिलवाता है | जल्दी से जल्दी केस का निपटारा हो जाए यह उसकी वकालत का मकसद है | इसने कभी गलत लोगों के और झूठे लोगों के केस नहीं लिए | लोगों को लगता है कि यह फ़र्ज़ी वकील है वरना इतनी जल्दी मुकदमा कहाँ निपटता है ? लोग इसके पास आने से कतराते हैं | जो आते भी हैं वे फीस नहीं देते | देते भी हैं तो कई किस्तों में | 
और एक इस चतुर वकील को देखिये | इसने ईमानदार होने की मूर्खता काला कोट पहनने के साथ ही त्याग दी थी | जिस अपराधी का केस कोई नहीं लड़ता मसलन रेप या मर्डर, उसे यह दोगुनी खुशी से लड़ता है | अक्सर यह वादी और प्रतिवादी दोनों को झांसे में रखता है | दोनों तरफ से उगाही करता है, और केस को जितना लंबा हो सके, खींचता है | 
यह देखिये इस नेता को | अभी हुए चुनावों में यह महामूर्ख साबित हो चुका है | यह जनता के बीच जाता है | समस्याएं सुनता है | यथासंभव सुलझाने का प्रयत्न करता है | कई बार दिन - रात भी एक कर देता है | बहुत परिश्रम से इसने क्षेत्र में अपना जनाधार बनाया था | पांच साल दौड़ - भाग करके सबके काम किये | यह अपनी जीत के प्रति सौ प्रतिशत आश्वस्त था | चुनाव परिणाम आया तो इसकी जमानत तक जब्त हो गयी | 
और इस घाघ को देखिये | यह कभी अपने चुनावी क्षेत्र का दौरा नहीं करता | किसी का काम इसने कभी किया हो ऐसा किसी की जुबां से नहीं सुनाई पड़ा | यह मात्र मीठी - मीठी बातें करता है | इसकी खासियत है कि कभी किसी काम के लिए इंकार नहीं करता, लेकिन काम भी कभी नहीं करता | शादी - विवाह, दुकान का उद्घाटन, मेला, सर्कस, सत्संग, रामलीला, भागवत हो या रोज़ा अफ्तार, सभी जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता है और लोगों के साथ खूब सेल्फी खिंचवाता है | चुनावी सभा जब हो तो इसके आंसू ऐसे टपकते हैं जैसे सारे जहाँ का दर्द इसके जिगर में आ गया हो | इस बार के चुनावों में रिकॉर्ड मतों से जीतने का रिकॉर्ड इसीके खाते में दर्ज़ है | 

इस छात्र पर गौर फरमाइए | यह मूर्खता का जीता - जागता सबूत है | यह सारी रात जाग कर पढ़ाई करता है | इसकी आँखों में मोटा चश्मा इसी का परिणाम है | इसने वर्षपर्यंत जी भर कर मेहनत करी | कभी नशा नहीं किया | सिगरेट नहीं पी | हर दिन नोट्स बनाये | जहाँ ज़रुरत पडी, रट्टा भी लगाया | कठिन सवालों को हल करने के लिए अध्यापकों के आगे - पीछे चक्कर काटे | कई रफ कॉपियां भर दी | जब रिज़ल्ट आया तो इसका रोल नंबर नहीं था | यह फेल हो गया था | 
एक तरफ यह विद्वान छात्र है | इसने साल भर किताब नहीं खरीदी | रोज़ क्लास गोल करता था | लड़कियों को लव - लैटर लिखता था | टीचरों की नक़ल उड़ाता था | कॉपी बनाने का तो इसने सपने में भी सोचा | इसने सिर्फ एक दिन मेहनत करी वह दिन था परीक्षा का | परीक्षा में पूरा पेपर इसने सुन्दर लेख में तीन बार उतार दिया | इसने हर विषय की कॉपी में पास करने की कारुणिक अपील के साथ सौ का एक नोट नत्थी किया | यह प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो गया है | 

इस मूर्ख अध्यापक पर नज़र दौड़ाइए | यह ज़िंदगी भर कक्षा में गला फाड़ता रह गया | चॉक से लिख - लिख कर इसका अंगूठा घिस गया | विद्यालय के बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानता था | उसके अपने बच्चे किस कक्षा में हैं, कोई पूछता तो उसे घर फोन करके अपनी पत्नी से पूछना पड़ता था | विद्यार्थियों के लिए लिए इम्पोर्टेन्ट प्रश्नों को छाँटता था | उत्तर बनाता था | फोटोस्टेट करके सबको बांटता था | परीक्षा से पंद्रह दिन पहले स्कूल में ही अपना डेरा कर लेता था और बच्चों को कई - कई बार परीक्षा का अभ्यास करवाता था | जब परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो इसके विषय में रिज़ल्ट इतना कम आया कि इसको अपने उच्चाधिकारियों को स्पष्टीकरण देना पड़ा | 
इस दूरदर्शी अध्यापक को भी देख लीजिये | इसने नौकरी लगने के बाद शायद ही किताब खोली हो | ब्लैक - बोर्ड से तो कोई पुरानी दुश्मनी है इसकी | विद्यार्थियों से गप - शप मारता है, उनके व्यक्तिगत मामलों में दिलचस्पी लेता है | चुटकुले सुनाता है | अध्यापकी उसके लिए वह बोझ है जिसे उठाना उसकी मजबूरी है ताकि उसके बच्चे इंजीनियर या डॉक्टर बन सकें | इसके विषय में रिज़ल्ट सौ प्रतिशत रहता है | बच्चे अपनी फ़िक्र से मेहनत करते हैं | हर वर्ष यह सर्वश्रेष्ठ अध्यापक का पुरस्कार ले जाता है | 

यह कवि है | मूर्ख शिरोमणि | इसकी उम्र बीत गयी कलम घिसते - घिसते | इसकी कविताएं बहुत गहरा असर करती हैं | उनमे नए - नए बिम्ब हैं | ताज़गी है | विषय की विविधता है | शब्दों की खूबसूरती है | मधुर एहसास हैं | प्रेम है | भाव हैं | लेखन के आलावा भी कोई दुनिया है यह नहीं जानता | इसने लिखने के लिए नौकरी का त्याग किया तो इसकी पत्नी ने भी इसका त्याग कर दिया | इसका खाना - पीना बमुश्किल ही चल पाता है | कई बार दोस्तों पर निर्भर रहता है तो कई बार खाली पेट ही सो जाता है | 
यह एक महान कवि है | यह रात - दिन चुटकुलों का अभ्यास करता है | अश्लील चुटकुले सुनाने में स्टेण्ड अप कॉमेडियनों को पीछे छोड़ देता है | जुगाड़ लगाकर महीने के दस कवि सम्मेलन बना ही लेता है | कभी ज़िंदगी में उसने चार कविताएं लिखीं थीं वो भी इधर - उधर से चुरा कर | उन्हीं चार कविताओं को गा - गाकर देश - दुनिया का चक्कर लगा आता है | अच्छी - खासी नौकरी छोड़ दी | आना - जाना हवाई जहाज से, पांच सितारा होटल में रहना, आते समय लाख का लिफ़ाफ़ा और एक आध प्रेमिकाएं हर दौरे में बन जाती है | वह लिखने वालों को मूर्ख न कहे तो और क्या कहे ?  

इस बेवकूफ पत्रकार को ही देख लीजिये | ज़िंदगी भर सच का दामन थामे रहा | कई लोग लालच देते थे पर इसकी कलम ने कोई समझौता नहीं किया | निष्पक्षता इसका जीवन मन्त्र रहा | घटिया प्रकाशन सामग्री से परहेज किया | आज यह फटेहाल और बदहाल है | बैंक में बैलेंस नहीं | समाज में इज़्ज़त नहीं | झोला लटकाए जब शाम को अपने घर लौटता है तो कमाऊ पत्नी आधा घंटा ताना मारने के बाद भोजन परोसती है जिसे वह अपमान के घूंट पीकर निगल लेता है |   
इस अक्लमंद पत्रकार पर नज़र डालिये ! इसकी पत्रकारिता में चाटुकारिता का अद्भुद मिश्रण है | हर पार्टी का खासमखास है | गुपचुप दलाली करता है | ब्लैकमेलिंग में भी इसका नाम आता है | अवैध संबंधों की खबर इतनी चटपटे तरीके से परोसता है कि पाठक बेसब्री से अखबार का इंतज़ार करते हैं | यह जिस अखबार से जुड़ता है, उसे जल्दी ही क्षेत्र का नंबर वन बना देता है | तंत्र - मन्त्र, अंधविश्वास, नंगी तस्वीरें, सेक्स स्केंडल को ढूंढकर लाने में अपनी पूरी प्रतिभा झोंक देता है | यह बँगला इसने अपनी इसी प्रतिभा की बदौलत खड़ा किया है |  

इस मूर्ख अभिनेत्री को भी देख लीजिये | अभिनय के भरोसे रह गयी | हर फिल्म में बढ़िया, दमदार अभिनय किया | एक - आध राष्ट्रीय पुरस्कार भी हाथ लगा | तमाम उम्र अपने अभिनय को सुधारने में लगी रही | अंग - प्रदर्शन के नाम पर नाक - भौं सिकोड़ती रही | आज इसके खाते में न फिल्म है न पैसे | कभी - कभार टी. वी. पर छोटा - मोटा काम मिल जाता है जिससे इसके घर का चूल्हा जल पाता है | 
इस बुद्धिमती अभिनेत्री ने बस अभिनय ही नहीं किया | अंग प्रदर्शन के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए | किसिंग सीन, बेड सीन स्विम सूट इसके मनपसंद दृश्य होते थे | आज देखो हर टॉप का हीरो इसके साथ फिल्म करने के लिए लालायित है | अगले दस साल तक की सारी तारीखें बुक हैं | हॉलीवुड इसके लिए बाहें फैलाए खड़ा है | कमाई का हिसाब तो पूछिए ही मत | वरना आप बेहोश हो सकते हैं |   

तो साहब ! मूर्खता का अपना अलग दर्शन है | अपनी परिभाषा है और अपनी व्याख्या हैं | समय, काल परिस्थिति के अनुसार सन्दर्भ बदलते रहते हैं | जो आज मूर्ख कहलाता है कल के दिन उसे बुद्धिमानी का खिताब मिल सकता है और जो आज बुद्धिमानी का ताज पहने हैं, कल के दिन महा मूर्ख घोषित हो सकते हैं | 
    

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी-28


उन्हें बहुत गर्मी लगती है  | 

वे बड़ी सी टाटा सफारी में आए | 'खचाक' से हनुमान मंदिर के आगे उन्होंने गाड़ी रोकी | भगवान् की मूर्ति को प्रणाम किया | आस - पास खड़े लोगों ने सोचा कि हनुमान जी को प्रणाम करने के लिये गाडी रोकी है | '' आजकल की पीढ़ी भगवान् को ज़्यादा मानती है '' ऐसा सोचने ही जा रहे थे कि उनके अनुमानों पर बिजली गिर पडी | 'बजरंग बली की जय'' बोल कर उन्होंने सामने दुकान की ओर नज़र दौड़ाई जहाँ उन्हें चिप्स, नमकीन, कोल्डड्रिंक सजे - धजे खड़े हुए दिख रहे थे | 
गाड़ी में सवार सभी जवान सभी जवान,नौजवान और ऊर्जावान मालूम पड़ते थे | संख्या में वे लगभग नौ या दस रहे होंगे क्योंकि गाड़ी पूरी भरी हुई थी | 
गाड़ी में सवार सिर्फ एक जवान ने आधी बाजू की टी - शर्ट और जींस पहनी हुई थी | अन्य सभी केवल बनियान और बरमूडा पहने हुए थे | गाड़ी का ए.सी. ऑन था फिर भी वे पसीने से लथपथ हो रहे थे |   
गाड़ी का दरवाजा जैसे ही खुला, बदबू का तेज़ भभका हमारे नथुनों से टकराया | अंदर शराब की बोतलें खुली हुई थीं | उनमे से वही जिसने पूरे कपडे पहन रखे थे, गाड़ी से नीचे उतरा और दुकान के अंदर चला गया | थोड़ी देर में सोडे की एक बोतल हाथ में लेकर वह गाडी के पास आया | बनियानधारी दूसरे युवा ने उसके हाथ में शराब की बोतल थमाई | सोडे को शराब में मिलाने की प्रक्रिया में उसने अपने चारों ओर नज़र दौड़ाई | आस - पास के सभी लोगों को अपनी ओर देखते पाकर वह बहुत खुश हो गया और दोगुने उत्साह से शराब में सोडा मिलाने लगा | 

काले रंग का बनियानधारी दूसरा युवा दौड़ लगाकर उसी दुकान से चिप्स और नमकीन के पैकेट हवा में लहराते हुए, जिससे कि सब अच्छी तरह देख लें, गाड़ी के पास ले आया | 

एक और लाल बनियानधारी युवा को इतनी तेज़ गर्मी लगी कि उसने खिड़की से बाहर अपना आधा शरीर निकाल लिया | पानी कीएक बोतल उसने अपने सिर पर उड़ेल ली | पास खड़ी महिलाओं के कौतुहल से भरे चेहरे उसे अच्छे लगे इसीलिये वह उन्हें देखकर अश्लील सा गाना गाने लग गया |  
एक सफ़ेद बनियानधारी को ए. सी. में इतनी गर्मी लगी कि वह भी गाड़ी से बाहर आ गया | उसके हाथ में बोतल थी वह उस बोतल को पकड़ कर ही नाचने लगा | मंदिर में हनुमान जी के दर्शनों के लिए आई महिलाऐं पूजा छोड़ कर उन्हें ही ताकने लगीं | वह और जोश में नाचने लगा | 
एक और पीले बनियानधारी ऊर्जावान ने गाड़ी से उतरकर सिगरेट जला ली | लगा कि बहुत देर से वह बाहर आना चाहता था लेकिन ए. सी. छोड़कर आ नहीं पा रहा था | उसने सिगरेट सुलगाई | धुएँ के के छल्ले बना - बना कर वह अन्य बनियांधारियों के मुंह पर मारने लगा | बीच - बीच में गाँव वालों की तरफ भी मुंह घुमा ले रहा था और धुँवा छोड़ रहा था | 
गाड़ी के अंदर से ज़ोर - ज़ोर की गाने की आवाज़ें आ रही थी | बाहर खड़े अन्य नाचने लगे और अंदर बैठे भी बैठे - बैठे ही नाचने की मुद्रा में आ गए |
एक अन्य दूसरी खिड़की से आधा बाहर निकल कर खिड़की के ऊपर ही बैठ गया, वहीं से टेढ़े - मेढ़े हाथ हिला कर नाचने का भ्रम पैदा करने लगा | 
पूरे कपडे पहने हुए नौजवान मंदिर के अंदर लगे हुए नल से बोतल में पानी भर लाया फिर सबके ऊपर उस पानी को छिड़कने लगा | गर्मी से सबसे ज़्यादा आहत वही लग रहा था | थोड़ी देर बाद उसने पानी को मुंह के अंदर भरा और पिचकारी सी मारते हुए कुल्ला करने लगा | सफ़ेद बनियानधारी को यह क्रिया बहुत पसंद आई उसने भी बोतल पकड़ कर इसे दोहराया | सारे बनियानधारी नीचे उतर गए और मुंह में पानी भर कर सड़क पर कुल्ला करने लगे | 

मन भर के नाचने, गाने, पीने, खाने, कुल्ला करने के बाद वे सब के सब आस -पास वालों को अकबकाई हालत में छोड़कर, अपनी टाटा सफारी में बंद होकर हल्ला मचाते हुए अगले पड़ाव की ओर चल पड़े | 

उसे बिलकुल गर्मी नहीं लगती | 

आँखों पर ऑपरेशन करने के बाद लगाने वाला काला चश्मा लगाए, सिर पर मोटे कपडे का फेंटा बांधे हुए, पुराना घिसा हुआ घाघरा, जगह - जगह से पैबंद लगी हुई कुर्ती, चेहरे पर हज़ार झुर्रियां और हाथों में लाठी पकड़े हुए वह उन दोनों के पास आकर खड़ी हो गयी | 

दोनों ने उसे देखा | उसने कुर्ती के ऊपर मोटा सा स्वेटर, पैरों में कपडे के पुराने जूते पहन रखे थे | ''इतनी गर्मी में स्वेटर ! हायराम ''! उनके मुँह से निकला | 
''ठण्डी लगरही है बहनजी ''|  
''कहाँ रहती हो'' ? 
गर्मी से बेहाल छायादार पेड़ के नीचे खड़ी दोनों में से एक ने सवाल किया | 
''पीरूमदारा में'' | कहकर उसने उनके आगे एक हाथ पसार दिया | 
''बाप रे ! इतनी दूर से यहां क्या करने आई हो ''? सवाल के हास्यास्पद होने का उन्हें पता था | 
''क्या करूँ ? पापी पेट का सवाल है | दवाई खरीदने के लिए पैसे चाहिए | यह ऑपरेशन हुआ है आँख का | इसी के लिए दवा चाहिए ''| 
''इस उम्र में ऐसे क्यों भटक रही हो ? बच्चे नहीं हैं क्या तुम्हारे''? फिर से  हास्यास्पद सवाल पूछकर उन्होंने अपना पल्ला छुड़ाना चाहा | 
''अब क्या बताऊँ ? दो लड़कियाँ हैं | दोनों का ब्याह भी कर दिया था | लेकिन अब दोनों के आदमी मर गए हैं | दोनों के  तीन - तीन चार चार बच्चे हैं | सबको पालने के लिए मुझे मांगना पड़ता है ''| कहकर वह हंस दी | 
उन्होंने उसे बीस - बीस रूपये दिए | खुश होकर वह चौराहे की तरफ तरफ चली गयी जहाँ बहुत सारे लोग बस के इंतज़ार में खड़े थे |  
चौराहे पर खड़े लोग उसे देखते फिर उसके स्वेटर को देखते | कुछ बड़बड़ाते हुए पर्स खोलने लगे तो कुछ बस को देखने का अभिनय करने लगे |  
पैसा देने वाले सवाल पूछ रहे हैं, ''इतनी गर्मी में स्वेटर पहन रखा है | तुमको गरम नहीं लगता ''?  
''नहीं लगता साहब बिलकुल नहीं लगता'' |  वह जवाब देती है | 
 

रविवार, 9 अप्रैल 2017

वह सेल्फी नहीं लेती


वह इस इस दुनिया का जीता - जागता अजूबा है | आठवाँ आश्चर्य है | लोग पूछते हैं कहीं उसका दिमाग खराब तो नहीं हो गया ? सब मानते हैं कि वह अपनी सुध - बुध बिसरा बैठी है | न उसके पास रुपयों - पैसो की कमी है और न ही किसी और सुख सुविधा की | सबसे बढ़िया वाला कैमरा फोन है उसके पास | 

वह हर छुट्टियों में बाहर घूमने जाती है | नदी, पहाड़, पर्वत, समंदर, हरियाली के बीच भरपूर समय गुज़रती है, लेकिन कोई सेल्फी नहीं खींचती है | पेड़ - पौधे, फूल, पत्तियां, पर्वत, पहाड़, पत्थर रो - रोकर उससे प्रार्थना करते हैं कि '' हमारा ऐसा अपमान न करो | ले लो न हमारे साथ एक सेल्फी | तुम्हारा क्या जाएगा ? हाँ ! हमारा होना सार्थक हो जाएगा | 

फूल टसुए बहाते हैं - ''अगर हमारा इस तरह अपमान होगा तो हम खिलना छोड़ देंगे | इनसे अच्छे तो वे होते हैं जो आते हैं, हमें पकड़ते है, अपने मुंह के पास ले जाते हैं धकाधक फोटुएं उतारते हैं | हमें इतना नोच देते हैं कि कई - कई दिनों तक हमारी गर्दन ही सीधी नहीं हो पाती है ''|  
पेड़ आँसू टपकाते हैं,'' अगर तुमने हमें पेट से पकड़ कर या हमारी डाल पकड़ कर झूलती हुई सेल्फी न ली तो हम अभी के अभी गिर कर प्राण त्याग देंगे | 

नदियां सिर पटकती हैं उसके पैरों तले -'' अगर हम पर पैर डाले हुए या किसी पत्थर के ऊपर खड़े होकर तुमने एक सेल्फी नहीं ली तो हम बहना ही छोड़ देंगी | तुम्हें उन लोगों से कुछ सीखना चाहिए जो जान हथेली पर लेकर साथ सेल्फी खींचते हैं | मैं तो गवाह हूँ ऐसे कई शूरवीरों की ,जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी दे दी सेल्फी की खातिर, लेकिन मुझे नहीं छोड़ा |  

पहाड़ सिसकियाँ भरने लगते हैं '' अगर हम पर चढ़ कर तुमने सेल्फी न ली तो हम अभी के अभी दुःख से भरभरा कर गिर जाएंगे | सेल्फी के कई दीवाने मेरी गोद में सदा के लिए सो गए हैं लेकिन सेल्फी के ऐसे ही जांबाज़ प्रेमी मुझे बहुत पसंद आते हैं |''प्राण जाए पर सेल्फी न जाए''वाली कहावत मेरे दिल को छू जाती है |   

समुद्र हिचकियाँ भरता है,'' स्विम - सूट पहन कर घुटनों तक खड़े होकर तुमने अपनी एक भी सेल्फी नहीं ली तो किस काम का है मेरा इतना बड़ा होना | इससे तो अच्छा है कि मैं सूख जाऊं | सेल्फी के कितने ही आशिक मेरी गोद में सदा के लिए सो गए हैं, फिर भी मुझे आशिकों की कभी कमी नहीं रही | हर बार मेरे नए - नए आशिक बन जाते हैं | 

मेघों ने बरसने से इंकार कर दिया है -'' भीगने की एक भी सेल्फी नहीं ली तुमने, अब हम बरसकर करें भी तो क्या ''? धिक्कार है हम पर | लानत है ऐसी ज़िंदगी पर | 

पहाड़ों पर बर्फ ने पड़ने से इंकार कर दिया, '' तुमने मेरे साथ कोई सेल्फी नहीं ली | मुझे छूकर ही आनंद उठा ले रही हो | अपने तन पर महसूस कर रही ऐसे तो मेरा गल जाना ही ठीक है | अरे ! लोग तो मुझे देखते ही मुझ पर ऐसे टूट पड़ते थे जैसे कोई भूखा रोटी पर टूट पड़ता हो | मेरा आनंद महसूस करने के बजाय मेरे साथ सेल्फियाँ उतारते रहते थे | मैं कब गल जाती थी उन्हें पता ही नहीं चलता था | 

सूखा आहें भरता है, '' कितनी मुसीबतों से मैं आता हूँ, सबके लिए मुसीबत लाता हूँ और एक यह औरत है एक भी सेल्फी मेरे साथ नहीं लेती | नेता लोग तरसते हैं मेरे लिए, कितने काम आता हूँ मैं उनके | कितनी सुंदर सेल्फियां लेते हैं वे मेरे साथ | आहा ! मन भीग - भीग जाता है |  

लेकिन वह औरत बड़ी गज़ब की हस्ती है | उसका दिल किसी भी पुकार पर नहीं पसीजता | वह घूमने का भरपूर आनन्द लेती है | हर जगह को अपनी आँखों में कैद करती जाती है | हर बूँद को शरीर में, आत्मा में महसूस करती है |  
 
अजीब औरत है | सेल्फी स्टिक बेचने आने वाले को दूर से ही मना कर देती है | वह आश्चर्य से आँखें मलता रह जाता है पर वह परवाह नहीं करती | वह बड़बड़ाता चला जाता है '' न जाने कौन सी दुनिया से आई है ? हद है | सेल्फी स्टिक जैसी जीवनरक्षक आवश्यकता वाली चीज़ नहीं ले रही है | पुलिस को खबर कर देता हूँ जाने कौन ग्रह से आई है'' ?   

अच्छी - खासी है | सुन्दर है | दुबली - पतली है | आकर्षक मुस्कराहट है | उसका फेसबुक अकाउंट बिना प्रोफ़ाइल पिक्चर विहीन है | सेल्फी से इतनी दुश्मनी है कि व्हाट्सप पर अपनी डी पी तक नहीं बदलती है | जो एक बार लगा दी सो लगा दी | 

वह यदा - कदा नए कपडे भी खरीदती हुई पाई जाती है लेकिन ''कैसी लग रही हूँ दोस्तों'' कभी उसके मुंह से किसी ने नहीं सुना | कपड़े गुस्से में मुंह फुला लेते हैं '' लोग तो मांग - मांग कर भी हमें ले जाते हैं और नई - नई डी पी लगाते हैं और यह तो अपने ही कपड़ों का अपमान करती है इसकी अलमारी में रहने से अच्छा तो हम फट जाएं, हममें आग लग जाए या हमारी चोरी हो जाए''| 
 
वह दोस्तों के साथ रीयूनियन मे हमेशा शामिल होती है लेकिन सेल्फियां खिंचवाते समय कोई न कोई बहाना बनाकर अलग चली जाती है | दोस्त घमंडी, नकचढ़ी, कहती हैं लेकिन वह हंसती हुई टाल जाती है |  पुरानी दोस्तें उसको ज़्यादा भाव नहीं देती है | ''बहुत बदल गयी हो तुम'' सबकी जुबां पर आजकल एक ही वाक्य होता है | रीयूनियन वाले उसकी इन्हीं हरकत से तंग आकर उसे बुलाना भूलने लगे हैं | 
 
वह नित नए व्यंजन बनाती है | खाती है | खिलाती है | लेकिन भूले से भी कभी उसकी फोटो कभी अपलोड नहीं करती | उसकी रसोई उससे खफा हो जाती है '' क्यों बना रही हो हमें ? बाहर की दुनिया को तो मालूम ही नहीं होने दोगी हमारे बारे में | इससे अच्छा तो हम ख़राब हो जाएं | सड़ कर मर जाएं | हमारे ऊपर कॉकरोच कूद जाए | फफूंद चिपक जाए | 

वह सारे त्यौहार धूमधाम से मनाती है | समस्त रीति - रिवाज़ों का पालन करती है | पारम्परिक परिधान और आभूषण धारण करती है लेकिन कोई अगर सेल्फी भेजने के लिए कहता है तो गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाती है | लोगों का मानना है कि वह पूरी तरह से नास्तिक हो चुकी है तभी तो किसी भी त्यौहार की सेल्फी नहीं भेजती | त्यौहार भी आहें भरता है '' कितने सुकून के दिन हैं | मैं क्यों और कैसे मनाया जाता हूँ यह किसी को आजकल पता नहीं होता | पूरा त्यौहार सेल्फी लेकर और सेल्फी भेजकर ही मना डालते हैं लोग | ये मेरे आराम करने के दिन हैं | थैंक यू सेल्फी !

वह अपने पति, बच्चों से बेइंतहा प्यार करती है | पति के साथ बड़े ही सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध हैं | उनके जन्मदिन, अपनी वर्षगाँठ, को धूमधाम से मनाती है | दूर - दराज के परिचितों को सुबह - सवेरे ही फोन पर बधाई दे देती है | लेकिन सेल्फी खींचने के नाम से बैचैन हो जाती है | फोटुएं कुढ़ते हुए कहती हैं '' लोग घर के अंदर लड़ते हैं, झगड़ते हैं, मार - पीट करते हैं, बात - बात पर की  तलाक धमकी देते हैं लेकिन सिर्फ सेल्फी के लिए एक हुए रहते हैं कि तलाक ले लिया तो मुस्कुराती हुई सेल्फी कैसे खीचेंगे ? लाइक करने वाले भी क्या कहेंगे कि कल तक तो इतनी चिपका - चिपकी वाली फोटुएं लगाते थे और अब तलाक ले रहे हैं |    

बड़े - बड़े लोगों को देखकर भी अनदेखा कर देती है | उनके बाजू में लपककर नहीं जाती | प्रसिद्द लोगों से मुलाक़ात होने पर उनके साथ 'एक सेल्फी हो जाए' कहकर जबरन गले भी नहीं पड़ती है | बड़े लोग परेशान हो जाते हैं '' कैसी महिला है यह ? हमारे साथ फोटो खिंचाने के लिए लोग पागल हो रहे हैं, एक यह है कि हमारी तरफ नज़र उठाकर भी नहीं देख रही है | आज हमारा सेलिब्रिटी होना अकारथ चला गया'' | वे अपने गले में पडी हुई मालाएं नोचने लगते हैं | अजीब औरत को कोई फर्क नहीं पड़ता |  

वह सबके शादी - ब्याह में भी शामिल होती है | किसी ने उसे आज तक स्टेज पर नहीं चढ़कर फोटो खिंचवाते नहीं देखा | शादी की सारी रस्मों का आनंद उठाती है | रिश्तेदारों से मिलती है | बुजुर्गों के हाल पूछती है | अपने हाल बताती है | सबके बच्चो की खैरियत लेती है | भोजन का भरपूर आनद उठाती है | लोग सेल्फी के लिए पुकारते रह जाते हैं लेकिन वह ''अभी आती हूँ '' कहकर वहां से नौ दो ग्यारह जाती है  

वह अपने घर में आए हुए अतिथि को पानी पिलाती है, खाना खिलाती है, स्वागत -सत्कार में कोई कोर - कसर नहीं छोड़ती है | मेहमान मुँह बिचकाते हैं,'' पागल तो नहीं हो गयी है यह ? आजकल तो लोग घर जाने पर पानी को भी नहीं पूछते बस दनादन सिर से सिर चिपकाकर सेल्फियां उतारते जाते हैं, और यह है कि इतना स्वागत किये दे रही है, कहीं बदहज़मी न हो जाए'' | 

वह पुस्तक प्रेमी है लेकिन कभी किसी पुस्तक के साथ उसकी फोटो किसी ने नहीं देखी | पुस्तक परेशान हो उठती है उसके शब्द बाहर निकलने को आतुर हो जाते है '' प्लीस हमारे साथ एक सेल्फी तो ले लो | हम तो ऐसे - ऐसे लोगों के हाथों में रही हैं जो पहला पन्ना खोलते ही सेल्फियां लेने जुट जाते थे और सिद्ध करते थे कि इस दुनिया में सबसे ज़्यादा साहित्य प्रेमी वही हैं | सेल्फी लेने के बाद हमसे ऐसे मुंह मोड़ लेते हैं  जैसे नेता चुनाव जीतने के बाद जनता से मोड़ता है | उस अलमारी में सजा देते थे जहाँ मेरी जैसी कई साहित्यिक किताबें बरसों से धूल फांक रही होती हैं ''|   

समाज सेवा उसका शौक है | खाली समय में अपने मोहल्ले के और झुग्गी - झोंपड़ी के बच्चो को पढ़ाती है | साल में एक बार अपने पुराने स्वेटर, कपडे इत्यादि दान करती है | शहर के धनाढ्य लोगों से उसने संपर्क बना रखे हैं जो उसे समाज सेवा के कार्यों में सहायता प्रदान करते हैं | आजकल ये पैसेवाले लोग उससे अप्रसन्न रहने लगे हैं क्योंकि वह यह काम उनके साथ बिना सेल्फी लिए करती है |  

रास्ते में कोई घायल पड़ा हुआ हो, मदद मांग रहा हो, किसी की तबीयत अचानक खराब गयी हो, एक्सीडेंट हुआ हो, चोट लग गयी हो तो ऐसे में वह सेल्फी नहीं खींचती है बल्कि उनकी मदद करने लग जाती है | एम्बुलेंस बुलवाती है, लोगों की गाड़ियां रुकवाती है, अपने पास जो कुछ भी होता है, फ़ौरन मदद करने में जुट जाती है | घायल इंसान हाथ जोड़ता रह जाता है ,'' बहनजी मेरे मरने की परवाह मत करिये | यह तो शरीर है, आज नहीं तो कल इसे नष्ट होना ही है | सेल्फियां अजर - अमर हैं |  आप अपना फोन निकाल कर पहले मेरे साथ सेल्फी ले लीजिये | मेरे भाग्य में बचना होगा तो बच ही जाऊंगा लेकिन उसका दिल बिलकुल नहीं पसीजता | वह पूरी ताकत लगा देती है उसे बचाने में | 

डॉक्टर उसके ऊपर शोध कर रहे हैं | उससे चिढ़ने वाले उसे देशद्रोही करार दे रहे हैं | पड़ोसी उसे पसंद नहीं करते | दोस्तों ने दूरी बना ली है | लेकिन वह अपनी दुनिया में मस्त है, जिसमे न सेल्फी है, न टेढ़े - मेढ़े  मुँह हैं और न जबरदस्ती हंसने - मुस्कुराने की शर्त है |    
 

शनिवार, 8 अप्रैल 2017

मुर्गा, बकरा, गाय और एक औरत का हलफनामा [ श्रेणी- व्यंग्य ]

जी बहिन जी ! 
अपनी तो कट गयी | साथ - साथ बीस साल कट गए जितने और बचे हैं, वे भी कट ही जाएंगे | 
शुरुआत में ऐसा नहीं था | नाम सुनकर ही घिन आ जाती थी | 

शादी के बाद पहली बार बाहर खाना खाने गए थे | हम ठहरे सदाबहार पनीर के आइटम खाने वाले, सो पनीर का कोई आयटम मंगवा लिया | उन्होंने मेन्यू में किसी चीज़ पर हाथ रखा और जब वेटर वह लाया तो उसे देखकर ऐसा लगा कि आंतें बाहर आ जाएँगी | प्लेट पर एक झींगा पड़ा हुआ था | उन्होंने जैसे ही उसे खाना शुरू किया हमें उबकाई आने लगी | किसी तरह से माफी माँगी और वाशरूम में जाकर सब खाया पिया उलट दिया तब भी वह वितृष्णा शांत नहीं हुई | 

हम तो ऐसे घनघोर शाकाहारी हुए कि पूछो मत | केक या बिस्किट में गलती से भी अंडा मिला हो तो नाक कई फ़ीट दूर से अलार्म देने लगती है | 
झगडे भी बहुत हुए और क्यों न होंगे भला ? वो घनघोर मांसाहारी हम घनघोर शाकाहारी | 

एक बार चिकन लाये थे कि घर में गरम कर के खाएंगे | बनाने को तो हम शादी से पहले ही साफ़ शब्दों में मना कर चुके थे लेकिन गरम करने की बात दिमाग में ही नहीं आई वरना नौबत यहाँ तक पहुँचती ही नहीं | हुआ यह कि वे लाये चिकन और बोले कि माइक्रोवेव में गरम कर देना | हमने मना कर दिया | चिकन सुनकर ही दिमाग भन्ना गया था | हमारे हाथों में नया - नया लैप टॉप था जो कि किस्तों में खरीदा था | हम नई - नई चैटिंग करना सीख रहे थे | उन्हें गुस्सा आ गया | उन्होंने सोचा कि हम चैटिंग में व्यस्त हैं इस कारण चिकन गरम करने से इंकार कर रहे हैं, सो हमारे हाथ से लैप टॉप लिया और पटक दिया ज़मीन पर | एक झटके में पचास हज़ार स्वाहा | 

तो उस दिन से लेकर आज तक हमने चिकन, मटन इत्यादि गरम करने के लिए कभी मना नहीं किया | हम समझ गए कि घिन अपनी जगह और आर्थिक नुकसान अपनी जगह | 

शादी तय होने से पहले  इस बात पर सहमति हो गयी थी थी कि वे जब नॉन - वेज खाएंगे तो उसके बर्तन अलग होंगे और हम उन्हें न छुएंगे न धोएंगे | घर में एक छोटी सी रसोई अलग से थी वहीं गरम करते थे, खाते थे और बर्तन धो देते थे | शुरू- शुरू में उन्होंने रखा बर्तनों को अलग | साफ़ भी किये | लेकिन बाद के सालों में बर्तनों को अलग रख तो देते थे लेकिन धोना भूल जाते थे | कई - कई दिनों तक पड़े रह जाते थे | बदबू का भभका पूरे घर में छा जाता था | सड़ांध आने लग जाती थी | उनसे कहो तो कहते थे, ''कामवाली को और पैसे दे दो और उससे साफ़ करवा लो ''| कामवाली पूरे पांच सौ रूपये पर राजी हुई | फिर एक दिन वह हमेशा की तरह बिना बताए छुट्टी पर चली गयी | झख मारकर करने पड़े साफ़ बर्तन | क्या करते? हर बर्तन से मुर्गे और बकरे की चीख आ रही थी | फिर तो सिलसिला चल पड़ा | अब तो न किसी की चीख सुनाई देती है न किसी की आँख प्लेट में दिखती है | पांच सौ रूपये हर महीने बचे सो अलग | 

एक बार हम बहुत बीमार पड़ गए | पिला दिया चोरी से हमको शोरबा | हम बोले '' बहुत स्वादिष्ट चीज़ बनाई है आपने | क्या है यह ? हंसने लगे '' वही जिससे तुम्हें बहुत घिन आती है'' | हमें काटो तो खून नहीं | ''चिकन' है क्या ''?  बहुत मुश्किल से पूछ पाए | 
'' नहीं मटन का शोरबा है बस | टुकड़ा एक नहीं दिया तुम्हें | देखो नाराज़ मत होना इससे तुम्हें ताकत मिलेगी  ''| 

हम बीमार बिस्तर पर | पेट में थोड़ी बहुत मरोड़ हुई लेकिन फिर सब सामान्य हो गया | हम चुपचाप बिस्तर पर पड़े - पड़े बचपन के दिनों को याद करने लगे कि कैसे हम नॉन - वेज की खुशबू से ही दूर भाग जाते थे | एक  एक बार पड़ोस के एक तांत्रिकनुमा रिश्तेदार ने नवरात्र में कन्या पूजन के पश्चात बकरा काटा | सुबह चार बजे उठाकर हमें उसका प्रसाद दिया | '' प्रसाद तो खाना ही पड़ता है'' कहकर उन्होंने हमारे मुंह के अंदर डाल दिया था | हमने उनके सामने ही थूक दिया सब और भागे सिर पर पैर रखकर | वे आवाज़ देते ही रह गए | कई सालों तक वे हमसे नाराज़ रहे कि हमने देवी के प्रसाद का ऐसे अपमान किया | हमें लगता है कि उन्हीं के श्राप की वजह से आज हमारे साथ ऐसा हो रहा है कि हम नॉन - वेज पका रहे हैं, उसके बर्तन धो रहे हैं और तो और शोरबा भी चख ले रहे हैं | 

'बीफ' क्या होता है यह भी शादी के बाद ही जाना | हमारे लिए नॉन वेज माने मुर्गा, बकरा और मछली | अब ये नई चीज़ सी फूड और बीफ थी | 
एक दिन ऐसे ही पीत्ज़ा खाने के बैठे | उन्होंने पूछा ''बीफ वाला है क्या ?'' हमारा दिमाग उसी समय घूम गया | ''आप यह भी खाते हैं क्या ''?
'' हाँ क्यों ? बड़ा स्वादिष्ट होता है | चखोगी ''? पूछा उन्होंने | 
उन्होंने इतने साधारण लहज़े में कहा कि जैसे यह तो रोज़ के दाल -भात खाने जैसा है उनके लिए | 

अब क्या करें ? औरत हुए हम | लड़ाई - झगड़ा क्या करें ? खाते हैं तो खाएं | साथ तो रहना ही है | इसी बात का शुक्र मनाते हैं कि हमारे मुंह में जबरदस्ती मीट - मुर्गा नहीं डालते |  
पहले कहते थे कि '' मुझसे प्यार करती हो तो खाना पड़ेगा ''| 
हमने कहा '' आप हमसे प्यार करते हैं तो आप ही छोड़ दीजिये ना ''| 
उस दिन से उन्होंने खाने के लिए कहना छोड़ दिया | 
 
होती थी दिक्क्त, बिलकुल होती थी शुरू के सालों में | साथ सोने में घिन आती थी | मन करता था कि कह दूँ '' मुंह से बदबू आ रही है'' पर हिम्मत नहीं होती थी | धीरे - धीरे बदबू कम होती गयी अब पूरी तरह से गायब हो गयी | अब तो कभी - कभी मन होता है कि उबला हुआ अंडा खाना शुरू कर दूँ | जब बहुत भूख लगी होती है और कुछ बनाने का मन नहीं करता और सड़क के किनारे खड़े हुए लोग चटखारे ले - लेकर अंडा पकौड़ा खाते हैं तो मन करता है कि मैं भी गप्प से खा लूँ | पेट तो भर जाएगा | 

 और मज़ेदार बात बताते हैं | हमारी छोटी बहिन है, उसने तो बाकायदा शोरबा पीना शुरू भी दिया है |  कहती है कौन अपने लिए अलग से पकाए | एक दो पीस खा भी लेती है | शादी से पहले हमसे भी ज़्यादा खतरनाक थी | कॉलेज जाने के रास्ते में मछली कटती देखकर उसने अपने आने - जाने का रास्ता ही बदल लिया था | दो किलोमीटर अधिक चल लेती थी लेकिन मछली का काटा जाना नहीं देख सकती थी | कभी गलती से रास्ते चलते कटे हुए या लटके हुए बकरों पर नज़र पड़ जाती थी तो दो दिन तक बुखार मे पडी रहती थी | 

अब बहिन दुखी नहीं होती | मुस्कुराते हुए कहती है ''अब साथ रहना है तो कुछ न कुछ समझौता करना ही पड़ता है  ''?
 
      

शनिवार, 1 अप्रैल 2017

वैधानिक चेतावनी - यह अप्रैल फूल नहीं है ।

अभी - अभी अपुष्ट सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि शिव तांडव सेना के माननीय रविन्द्र रिलेक्सो गायकवाड़ ने देश की जनता से वादा किया है कि वे अबसे पैरों में  कभी चप्पल या जूते नहीं पहिनेंगे । 

देश का सबसे ज्वलंत मंदिर - मस्जिद का मुद्दा सुलझा लिया गया है । विवादित जगह पर ड्यूप्लेक्स बनवा दिया जाएगा । नीचे की मंज़िल पर मंदिर और ऊपर  के हिस्से में मस्जिद का निर्माण होगा । श्रद्धालु पहले मंदिर जाएंगे उसके पश्चात उनका मस्जिद में इबादत करना अनिवार्य होगा, ऐसा नहीं करने वालों को  दंडस्वरूप निर्मल बाबा के प्रवचन सुबह - शाम सुनवाए जाएंगे ।       

उत्तर प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में गुटखा खाने से तत्काल प्रभाव से पाबंदी हटी । पाबंदी के दौरान जनता ने पाया कि गुटखा खाना बैन होने से सरकारी कर्मचारियों द्वारा मुंह खोल कर साफ़ शब्दों में घूस लेने की मात्रा में बहुत इजाफा हो गया था इससे त्रस्त जनता ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री से अपील करके सभी कर्मचारियों के लिए दफ्तर में काम के समय गुटखा खाना अनिवार्य करवा दिया है । 

देश भर में एंटी - रोमियो स्क्वाड के बदले 'एंटी रोमांटिक स्क्वाड' का  गठन किया गया है । इसमें उन पति - पत्नियों को पकड़ कर हवालात में डाला जाएगा जो सार्वजनिक स्थानों पर चलते हुए एक - दूसरे को ' मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा ' वाली निगाहों से देखते हैं और हर प्रेमी जोड़े को प्रेम के चक्कर में न पड़ने की मुफ्त सलाह बांटते फिरते हैं । 

मायावती ने विधान सभा चुनावों के दौरान हुई अपनी पार्टी की करारी हार स्वीकार कर ली है । उन्होंने मान लिया है चुनावों के दौरान कि ई.वी.एम. के साथ कोई छेड़ - छाड़ नहीं हुई थी बल्कि जनता ने ही इस बार पार्टी के साथ छेड़ - छाड़ कर दी थी । जनता का मन है चाहे तो छेड़ दे चाहे तो छोड़ दे ।  

सांसद मनोज तिवारी ने शिक्षिका के साथ दुर्व्यवहार पर '' गुरु - गोविन्द दोउ खड़े, काके लागूं पांय '' सस्वर गाकर माफी मांग ली है । 

प्रधानमंत्री जी की 'घर वापसी' हो गयी है । क्योंकि विदेश में कोई उनकी बात अब सुन नहीं रहा है, अतः इस वर्ष वे देश में ही बने रहेंगे और जनता से हर महीने के स्थान पर हर दिन अपने मन की बात किया करेंगे ।   

सोशल मीडिया में मौजूद भक्त लोग अपने भगवान् की आलोचना को स्वस्थ भाव से ग्रहण कर रहे हैं । गाली - गलौच, माँ - बहिन एक करना इत्यादि बंद हो चुका है ।  सरकारी नीतियों का विरोध करने पर भक्तों द्वारा लाव - लश्कर लेकर टूट पड़ने की प्रवृत्ति बंद हो चुकी है । ।  

राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष बन गए हैं । अब वे आने वाले लोक - सभा के चुनाव में अपनी फटी जेब में हाथ डालेंगे और जादू से सीटें निकाल कर दिखाएंगे । 

जनता ए.टी.एम. से जितनी बार भी चाहें, नोट निकाल सकते हैं । अपने खाते में रकम न होने की दशा में दूसरे के खाते से रूपये निकालने की सुविधा देने पर आर. बी. आई. गंभीरता से विचार कर रहा है । 

टुंडे कबाब का मामला भी शांत होता नज़र आ रहा है। टुंडा प्रेमी घर में अपनी पत्नियों के हाथ का बना टिंडा ही टुंडा समझ कर बड़े ही स्वाद से खा रहे हैं । 

सोशल मीडिया ने कसम खा ली है कि आज से वे केजरीवाल और राहुल के ऊपर चुटकुले न तो बनाएँगे और न ही फॉरवर्ड करेंगे । दोनों को इस साल नेता का दर्जा दे दिया जाएगा इसके लिए संसद के दोनों सदनों में बिल लाया जाएगा । 

जियो ने घोषणा करी है कि जो लोग पिछले साल से जियो की मुफ्त सेवाओं का लाभ ले रहे हैं, उन्हें आने वाले सौ सालों तक मुफ्त सुविधा मिलती रहेगी । यह मुफ्त सुविधा ग्राहक के मरने के बाद भी जारी रहेगी । 

अखिलेश यादव ने हार के बाद मुलायम सिंह यादव से 'नेताजी' न कह कर 'पिताजी' कहना शुरू करदिया है। अब वे सड़कों पर ''यू.पी. को मैं माई - बाप पसंद है '' गाते हुए सुनाई दे जाते हैं । 



बुधवार, 29 मार्च 2017

मुबारक नव संवत्सर !

मुबारक नव संवत्सर !

प्रेम पर पहरे 
प्रेमियों पर कहर 
दबंगों की दबंगई 
पति - पत्नी पर भी 
शक्की नज़र । 

मुबारक नव संवत्सर !

कबाब पर बवाल 
टुंडे पर सवाल 
चटोरों की चाहत 
गौ - भक्त आहत 
घनघोर है टक्कर । 

मुबारक नव संवत्सर !

मंत्री की दिखी ढिढाई 
चप्पलों से करी पिटाई 
जब बैन हुआ उड़ना 
चेहरे पर उड़ी हवाई 
आ गए पैर ज़मीन पर 

मुबारक नव संवत्सर !


क्रिकेट में मिल गयी जीत 
हार गए कंगारू 
जंग - ज़ुबानी कह रही 
किस खम्बे पर खीज उतारूं ?
ग्रहण लग गया दोस्ती पर । 

मुबारक नव संवत्सर !


कपिल - सुनील का झगड़ा 
करेंट लगा यह तगड़ा
शो की गिरी टी.आर.पी.
साथ छोड़ गए और भी 
कहत "कपिल" अब सुनो भई साधो !
खोलो न बोतल वक्त -ए-सफर 

मुबारक नव संवत्सर !


सोमवार, 27 मार्च 2017

बहुत दिनों बाद एक पैरोडी --------

यू पी में खेल हुआ बच्चे सा 
मिट्टी के घर जैसे ओ कच्चे सा 

हाथी को मारा धप्पा 
ई ई ई ई 
साइकिल सर पर रख दौड़े 
और फेंका चक्का -चक्का 
भागे जैसे भगौड़े 
खुल गया भेद कच्चे चिट्ठे सा । 

यू पी में खेल हुआ बच्चे सा
जड़ में पड़ गए मट्ठे सा ।                          

वोटों का पहाड़ चमके जैसे चन्दा मामा 
देवबंद की जीत लागे जादू कारनामा 

वोटर की शान्ति से खाए गच्चे सा ।                             

यू पी में खेल हुआ बच्चे सा 
मिट्टी के घर जैसे ओ कच्चे सा । 

रविवार, 26 मार्च 2017

मौसम ---------

दो ही दिन में 
यह क्या से क्या हो गया?
पलक झपकते ही पारा 
इतना ऊपर चढ़ गया । 
संभाल भी ना पाए थे अभी 
कम्बल और रज़ाई 
कि फुल स्पीड पंखा पकड़ गया । 
पूछ रहे हैं रो - रोकर 
दस्ताने और ये मेरे मफलर 
कि जाड़े का वह मौसम 
कब, कहाँ और कैसे बिछड़ गया ?


निरुत्तर प्रदेश --------

योगी को मिल गया ताज 
भोगियों की उड़ रही हवा है ।  
हो कैसा भी मर्ज़ 
अब एक ही दवा है । 
घूम रहे थे जो लड़कियों के पीछे - पीछे 
बनके रोमियो, मजनू और फरहाद 
उनके लिए अब 
सिर्फ और सिर्फ 
हवालात की हवा है । 


ई. वी. एम ------- 

बहुत ऊंची चीज़ है 
यह वोटर मोहतरमा !
यह कभी भेड़ हो नहीं सकता । 
और ई.वी.एम.जैसी मशीन 
कोई छेड़ दे, हो नहीं सकता । 
करारी हार को पचा पाना 
होता नहीं इतना आसान
मखमली गद्दी का नज़रों के सामने से 
खिसक जाना,
अरे 
ये नज़ारा तो 
अच्छे अच्छों को हज़म नहीं होता । 


उत्तराखंड  -----------

अनुमान सारे थे जितने 
धरे के धरे रह गए । 
उड़ रहे थे कल तलक जो आसमानों में 
दिन- रात को एक करके 
आज ज़मीन पर खड़े के खड़े रह गए । 
दारू, कम्बल, मुर्गा,
साड़ी, मंगलसूत्र और रुपैय्या 
भांप नहीं सकते किसी के मिज़ाज को 
ये वोटर हैं साहेबान ! वोटर 
इनको पढ़ने में तो 
बड़े से बड़े रह गए । 


बाहुबली  --------

बिना हथौड़े के 
चट्टान तोड़ी नहीं जाती । 
अकेले चने से भाड़ 
फोड़ी नहीं जाती । 
कौन समझाता उन्हें 
बताता कौन उन्हें 
कि 
टूटे हुए सपने और 
टूटी हुई उम्मीदें 
महज़ लफ़्फ़ाज़ों के 
फेवीकॉल से 
जोड़ी नहीं जाती ।