मंगलवार, 19 मई 2009

पेश हैं श्रीमान ......आज के ताज़े बयान ...

मंत्री बनने का अभी इरादा नहीं है .....राहुल
 
जब मन बना लूँगा तो
आप ही पता चल जाएगा
पहले बनूँगा मंत्री ,या
डायरेक्ट ही प्रधानमंत्री
सबर करो भाई मेरे,
जल्दी ही पता चल जाएगा
 
बाकी हैं बहुत सारे
काम अभी बंधु मेरे
गद्दी पर जो बैठ गया तो
उन्हें कौन निपटायेगा ?
 
सबसे पहले मेरी
शादी होगी अब तो
ख़ाक गलियों की अब
छान नहीं पाउँगा
मम्मा और दीदी की
मान लूँगा हर बात
बार बार ना हो परेशानी
किसी को भी, इसीलिए
भविष्य के पी. एम्. को
जल्दी से ले आऊंगा .....
 
 
सपा ...बसपा बाहर से समर्थन देंगे ...
.
कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा
टूटा भानुमती का कुनबा
मुश्किल से था जो जोड़ा
इस वोटर ने कमबख्त
कहीं का हमको अब ना छोड़ा
जिसको कहा था कल गधा
आज वो अपना बाप है
खाने के तो मिल ना सके, हाय !
दिखने के हम पूरे पूरे दांत हैं
कुर्सी से है प्यार इतना
मरते क्या न करते,
पड़ गया हमको ऐसा कहना
मजबूरी में ही सही
सरकार के हम भी साथ हैं
 
हार की नैतिक जिम्मेदारी ....खंडूरी
 
कड़कती धूप में
ऐसे होती है बर्फबारी
रह जाती है धरी की धरी
बड़े बड़ों की होशियारी
खड़े थे कबसे कुर्सी को ताके
उनकी आखिरकार देखो
आ ही गयी अबकी बारी
कभी कभी हार भी
बन जाती  है सुखकारी
कह रहे है हँस हँस कर
सी. एम्. इन वेटिंग 
भगत सिंह कोश्यारी .....
 
हार के जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा .....खंडूरी 
 
जिसने मूंछों को मेरी 
नब्बे डिग्री झुका दिया 
एक ही झटके में खिलते हुए 
कमल को मुरझा दिया 
 
पता है मुझको भली प्रकार 
मैं जो ऐसे गया हूँ हार 
वह कौन सा शख्स है 
जो है इसका जिम्मेदार 
 
वेतनमान इनको छठा 
सबसे पहले मैंने दिया 
और इन्होने देखो मुझको 
छठी का दूध याद दिला दिया 
 
उसको तो अब मैं बिलकुल भी 
बख्श नहीं पाउँगा 
बिजली और पानी को करके गुल 
छापों की बरसात करूँगा 
तबादलों का लम्बा सा 
दौर भी एक  चलाऊंगा 
 
जिसने मेरी गद्दी छीनी
उस हरामखोर वोटर की
नींद तो रही  एक तरफ
चैन भी हर जाऊंगा ...
 
मनमोहन ने माया को बहिन कहा ....
 
जिसने उसको बहिन बनाया
कलाई पर धागा बंधवाया
करम सदा ही फूटे उसके
उसके अपने रूठे उससे
पहली पंक्ति से डायरेक्ट
लाइन में सबसे पीछे आया
बहुत ही अच्छी है यह बात
जो तुमको नहीं है याद
याद करो उस मुरली मनोहर को
थे जो नेता पहली कतार के
खड़े है कितने पीछे आज ??
 
 
 
 
 

7 टिप्‍पणियां:

  1. शेफाली जी
    आपकी समयानुकूल रचना ने वाकई राजनीति की पोल ही खोल दी,
    लिखते रहिये.
    - विजय

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  2. इससे बुरी बात और कोई नहीं हो सकती...
    राजशाही गयी नहीं देश से...
    हम तो हैं ही गुलाम गोरी चमडी के...
    और भारत तो इनकी बपौती ही है!!!

    पर कांग्रेस को इतनी सीटें भी नहीं मिली की सब जे जे कार करें!!!

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  3. शेफाली जी।
    मंथन में तथ्य है,
    आपकी बात सत्य है।

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