शनिवार, 16 मई 2009

हमने अपनी हार स्वीकार कर ली है

साथियों आज चुनाव का परिणाम आ गया है ....और हमेशा की तरह हारने वाले वही घिसे पिटे संवाद कहेंगे ....कुछ लाइनें जो सदियों से चली आ रही हैं ...उन लाइनों का  छिपा हुआ मतलब क्या होता है, इसका मैंने पता लगाया है ....
 
हमने अपनी हार स्वीकार कर ली है
 
इसके अलावा आपके पास
बाकी कोई चारा नहीं था
क्यूंकि
आपके सिर पे करारी हार
उनके गले फूलों का
हार सजा था ..........
 
 
हम विपक्ष में बैठेंगे
 
ऐसा कहना बहुत ज़रूरी है
ये आपकी मजबूरी है
क्यूंकि
जब हार जाते हैं तो बस
विपक्ष में ही बैठ पाते हैं
 
 
हम जनता की सेवा करेंगे
 
सच है यह सोलह आने
क्यूंकि
जब बैठे हों गद्दी में तो
सेवा करने के क्या माने?
 
हम जनादेश का सम्मान करेंगे
 
जनादेश का हम बहुत सम्मान करेंगे
पूरे पांच साल तक कैसे
भला इंतज़ार करेंगे ?
 भिडाएंगे ऐसी जुगत,करेंगे कुछ ऐसा,
अगले ही साल चुनाव के हालात करेंगे.
 

20 टिप्‍पणियां:

  1. सही बात है, चुनाव हारने पर वो वास्तव में कहना तो चाहते हैं:-
    वोटरों ने हमें जूते दे मारे हैं,
    हार स्वीकारने के अलावा चारा भी क्या है.
    सत्ता पक्ष में हमें अब बैठने ही कौन देगा.
    जनता को मारो गोली, अपनी ही सेवा नहीं कर पाएंगे.
    जनादेश का सम्मान नहीं करेंगे तो कोर्ट भी जुतियायेंगे न..

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  2. पार्टी और नेता चाहे कोई भी जीते, पर जनता की तो हार ही होनी है. और वो बेचारी हार ही गई.

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  3. अच्छा व्यंग मारा है आपने और नेताओ की वर्तमान चरित्र से भी बखूबी परिचित करवाया है....

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  4. व्यंग्य तो बढिया किया है, लेकिन ऐसा लगता है कि अगले पांच साल तक महारानी और युवराज को और मजबूती मिलेगी. अगले साल चुनाव की जुगत मुश्किल है.

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  5. ... सुन्दर अभिव्यक्ति ... हारने के बाद भी हारे हुए लोग घर मे जाकर नही बैठेंगे!!!

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  6. ये तो हिंदी फिल्मों के मशहूर डायलोग की तरह है जो हर बार बोले जाते है..!नेता अब क्या करें झेंप मिटने के लिए ये सब तो कहना ही पड़ेगा..

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  7. हम जनादेश का सम्मान करते हैं। पार्टी बैठक में हार के कारणों की विवेचना करेंगे।

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  8. हमारी मजबूरी को सही आइना दिखाया है...

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  9. हम भी राजघराने से हार स्वीकार करते हैं।
    घुघूती बासूती

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  10. HAARI KEWAL JANATA HAI.
    KYO KI USAKE PAS NETA NAHI HAIN.
    ACHHI PRASTUTI

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  11. bhut hi sateek
    na hme satta me rhkar kam krna hai aur bahr rhka
    r sirf kam bigadna hai .
    chahe vo koi bhi parti ho .

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  12. वकई काबिले तारीफ़ सटीक और सामयिक व्यंग लिखा बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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