रविवार, 7 जुलाई 2013

आतंक से मिल जुल कर लड़ लेंगे ।

हम इस पार से भभकी देंगे ,
वो उस पार से धमकी देंगे ।
इस पार से हम फिर घुडकी देंगे 
उस पार से वो फिर चुटकी लेंगे ।
हम एक कदम, एक कदम वे,
थोडा सा आगे को बढ़ लेंगे, इस तरह
आतंक से मिल जुल कर लड़ लेंगे । [ मास्टरनी ]


16 टिप्‍पणियां:

  1. निश्चय तो कब से कर चुके हैं, अब उठा भी जाये, कहीं उठ न जायें।

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  2. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [08.07.2013]
    चर्चामंच 1300 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अमर शहीद कैप्टन विक्रम 'शेरशाह' बत्रा को सलाम - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. ऐसी भभकी और घुरकी भी मजेदार है
    ब्लॉग बुलेटिन से यहाँ पहुंचना अच्छा लगा ...!!

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  5. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत बधाई आपको .

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  6. bilkul sach - sirph ek seema paar kee bat nahin balki poore vishva men phaile aatankvad ko sulajhana hoga .

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  7. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत बधाई आपको .

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  8. बहुत सही ...सब मिल जुल कर ही चलता आ रहा है ..

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  9. आपके विचारों से पूर्णतयाः सहमत हूँ..

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  10. हमारी सरकार की सोच को शब्द दे दिये आपने । जोरदार ।

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  11. बस यही तो हो रहा है, सच कहा आपने,









    यहाँ भी पधारे ,
    रिश्तों का खोखलापन
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

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