सोमवार, 3 जुलाई 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी#34 टेलीफोन

बहुत परेशानी है | समाधान नहीं मिलता | हर कम्पनी बात करवाने के लिए बैचैन है | कोई कह रहा है पचास पैसे में देश भर के अंदर कहीं भी बातें करिए | कोई पच्चीस पैसे का लुभावना ऑफर दे रहा है कोई दस पैसे का लालच दिखा रहा है | भले ही पचास पैसे, पच्चीस पैसे या दस पैसे किसी के पास नहीं होंगे लेकिन बन्दा फिर भी खुश है कि वाह ! दस पैसे में बात करने को मिलेगी | और तो और मुफ्त बातें करने का बेशकीमती खज़ाना तक हमारे सामने कंपनियों ने खोल कर रख दिया गया है | इतना सस्ता ज़माना है कि मुद्रा बाज़ार से गायब है लेकिन विज्ञापन में धड़ल्ले से चल रही है | 

खुश होने वाले खुश हैं | बहुत खुश हैं | उनके पास अनलिमिटेड बातें हैं | उनके पास अनलिमिटेड दोस्त हैं | वे अपने अनलिमिटेड दोस्तों से अनलिमिटेड बातें करेंगे इसीलिए कम्पनियाँ इतने सस्ते लुभावने ऑफर लुटा रही हैं | 

मेरी समस्या यह है कि बात करने की इतनी खुलेआम लूट के बावजूद मैं हूँ कि खुश नहीं हो पा रही हूँ | कैसे खुश होऊं ? खुश होने के क्या उपाय अपनाऊँ ? जब अनलिमिटेड बातें करने के दिन थे, तब मोबाइल तो क्या लैंडलाइन का भी नाम नहीं सुना था | तब मित्रों से अनलिमिटेड बात करने के लिए स्कूल -कॉलेज जाना पड़ता था | पढ़ाई जैसी फ़ालतू चीज़ भी साथ में हो जाया करती थी, जिसमे हमारी कोई गलती नहीं होती थी | ऐसे ही साल भर बात करते - करते पास भी हो जाया करते थे | अब तो यह टीचर्स की मेहरबानी लगती है कि हो न हो वे भी इसी ऑफर के तहत हमें पास करते रहे होंगे कि स्कूल आने के साथ - साथ पास होना फ्री मिलेगा | हमारे समय में कक्षाएं भी भरी रहती थीं | आजकल कक्षाएं खाली रहती हैं क्योंकि बात करने के लिए स्कूल - कॉलेज जाने के स्थान पर सबके हाथ में मोबाइल आ गया है | अब गप्पें मारने के लिए स्कूल जाने की ज़रुरत नहीं है | घर बैठे - बैठे बातें हैं |अनलिमिटेड बातें हैं | 

कहते हैं कि मोबाइल और समय का कभी मेल नहीं होता | अब समय है, मोबाइल भी है,अनलिमिटेड वाउचर भी है, लेकिन कोई बातें करने वाला नहीं है | ये कम्पनियाँ बात करने वाला भी फ्री क्यों नहीं बांटती ?

हमारा क्या था ?  एक आम लड़की का जीवन,  जिसे आजकल के बच्चे जीवन मानने को ही तैयार नहीं होते | हमारी पढ़ाई पूरी हुई | माँ - बाप ने शादी तय करी | लैंडलाइन भी अब तक घर में आ गया था, लेकिन शादी से पहले बातें करना अच्छा नहीं माना जाता था | इस अवधि में आस - पास वालों ने सब जगह हमारे लैंडलाइन का नंबर बाँट दिया था | आधा समय लोगों को बुलाने में और आवाज़ लगाने में ही निकल जाता था | कुछ समय बाद ''फलाने को बुला दो '' सुनते ही फोन काटना और रिसीवर रखकर आवाज़ लगाना भूल जाने जैसी हरकतें सीख लीं था | परिणाम यह हुआ कि साल भर के अंदर ज़्यादातर लोगों के हाथ में मोबाइल दिखने लगा | आश्चर्य की बात है कि बहुत कम लोगों ने घर में लैंडलाइन लगवाया | 

तय समय पर शादी हुई | शादी के बाद सोचा कि हाथ में मोबाइल है, समय भी है, अनलिमिटेड प्लान भी है तो क्यों न पति से उनके ऑफिस में बात कर ली जाए | शादी से पहले बातें करने का मौक़ा नहीं मिल पाया था सो उसकी कसर अब पूरी कर ली जाए,  ऐसे ही सोच कर फोन लगाया तो जवाब आया, ''क्या बात है ? जल्दी कहो | बहुत काम पड़ा हुआ है ''| नहीं कहा मैंने कि अनलिमिटेड टॉक टाइम है ज़रा बातें कर लो | उन्होंने झल्ला कर फोन काट दिया | घर आकर अनलिमिटेड लताड़ अलग लगाई ,''खबरदार ! जो कभी फ़ालतू में फोन किया | ऑफिस वाले मज़ाक उड़ाते हैं | इतना ही बोलने का शौक है तो दीवारों से बातें करो | शीशे के आगे बोल लिया करो''|

इस ग्रह में जीवन की सम्भावना की तलाश फ़िज़ूल देखकर मैंने दूसरे ग्रह में जीवन तलाशने की सोची,  सोचा बच्चे बड़े होंगे तब जी भर के बातें करने का अधूरा ख़्वाब पूरा करूंगी | बच्चों से अनलिमिटेड बातें करने में कम से कम डाँट खाने का खतरा तो नहीं होगा |  

दिल में मौजूद इस ख्वाहिश को पूरा करने का मौका आखिरकार आ ही गया | बेटी बाहर पढ़ने के लिए चली गयी | उसके जाने के एक दिन बाद ही उसे फोन मिलाया तो वह झल्ला कर बोलती है, ''क्या अम्मा ! अभी - अभी क्लास छूटी है | अब कोचिंग जा रही हूँ | तुम पुराने ज़माने की माँओ की तरह हर समय शक करती हो''| मैं ज़ाहिर सी बात है कि अपना सा मुंह लेकर रह गयी | 

अब कौन रह गया जिससे अनलिमिटेड बात की जा सकती है? मैंने मन ही मन अपनी पुरानी दोस्तों को याद किया | पुरानी दोस्तें अब गए जमाने की बातें हो चुकी हैं | पते खो गए | नंबर भी खो गए हैं | बहुत मुश्किल से एक नंबर मिला | मैंने उत्साह से भरकर फोन लगाया तो उसने पहले तो पहचाना ही नहीं | काफी याद दिलाने के बाद उसने जो बात करी तो मैंने स्वयं ही फोन काट दिया | उसने कहा, '' अच्छा ! तुम्हारी आवाज़ तो बहुत बदल गयी है | आज क्या काम है जो मेरी याद आ गयी | कॉलेज के ज़माने में तुम अपने नोट्स किसी को नहीं दिखाती थी | याद आया कुछ ? और तुमने मेरी किसी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया जो मैंने तुम्हें कॉलेज छूटने के बाद लिखीं थीं | आज ज़रूर किसी काम से फोन कर रही होगी, है ना ''?

मैं उससे अनलिमिटेड बातें करने का सपना देख रही थी और वह मुझे अनलिमिटेड आइना दिखाने की ठाने हुई थी | 

काफी चिंतन के बाद यह निष्कर्ष निकल कर आया कि एक आम औरत की ज़िंदगी ऐसी ही होती है, अनलिमिटेड के दौर में लिमिटेड सम्बन्ध और लिमिटेड बातें | इससे तो अच्छी आधुनिक हिंदी कहानी की नायिका की ज़िंदगी होती है जिसमें अवैध सम्बन्ध होते हैं, उनसे चैट होती है, बातें होती हैं | इधर कुछ समय से मैंने जब भी किसी साहित्यिक पत्रिका को उठाया, उनमे छपी कहानियों में इस बात को महसूस किया कि सिर्फ यही नायिकाएं अनलिमिटेड बातें कर सकतीं है क्योकि इनके अनलिमिटेड सम्बन्ध होते हैं | 


6 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! अनलिमिटेड बातें तो सिर्फ खुद से ही की जा सकती हैं..या फिर अपने पाठकों से..जैसे आप कर रही हैं इस वक्त..

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  2. जबरदस्त हमेशा की तरह, बहुत शुभकामनाएं.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  3. अपना जमाना मुझे भी याद आया टेलीफोन के कारण
    बढ़िया लिखा

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