बुधवार, 4 मार्च 2009

यू. पी. की विधानसभा में बम.......कोरी अफवाह नहीं थी

डरते, सहमते कांपते

गिरते पड़ते हाँफते

पहुंचा जब विधानसभा

काँटा सा दिल में चुभा

 

देखा जब उसने

माया का जैसा

प्रक्षेपास्त्र

मुलायम का जैसा

ब्रह्मास्त्र

समझ में उसको आ गयी

अपनी नन्हीं सी औकात

 

ऎटम, न्यूक्लिअर, हाइड्रोजन

जिनके आगे टिकते हों कम

देख के ऐसे -ऐसे बम

निकल गया था उसका दम

 

इनकी बातों में बारूद है

नस-नस में भरे हुए अंगार

ये जलते बिन तीली के

सामने हो जब कोई शिकार

 

हुआ शर्म से पानी-पानी

फिस्स हो गया बेचारा

आया था फट पड़ने को

ढेर हुआ किस्मत का मारा