शनिवार, 28 मार्च 2009

एक प्रश्न पर हैं सब मौन ......

कश्मीर से लेके कन्याकुमारी
मोदी हो या कोई बुखारी
मेरा बस एक सवाल
जिस पर छिड़ी ना बहस कभी
मचा न कोई बबाल
इस एक प्रश्न पर सारे दल
हो जाते हैं बिलकुल मौन  
कटता है जिसका हाथ सदा 
वह आखिर है कौन?

5 टिप्‍पणियां:

  1. शैफाली जी,

    बड़े ही अच्छे मौके पर दागा है प्रश्न
    नेता बगलें झांक रहे, गुरू खड़े हैं सन्न
    इस अबूझ पहेली का कोई हल ना पाया
    हाथ कटा हरबार जो ठप्पा ठोंक आया

    बहुत ही अच्छी रचना है. बधाईयाँ.

    मुकेश कुमार तिवारी

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  2. शैफाली जी,
    एक प्रश्न पर हैं सब मौन ...... रचना से जाहिर है कि
    जनता का ही हाथ कटता है सदा
    बाकी के तो मौज उडाते हैं;

    कटता है जिसका हाथ सदा
    वह आखिर है कौन?
    - विजय

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