बुधवार, 22 अप्रैल 2009

१८ अप्रेल की वो अविस्मरणीय शाम

१८ अप्रेल की शाम एक अविस्मरणीय शाम बन गयी ....क्यूंकि इस दिन हमने दिल्ली में अपनी ऑरकुट की एक कम्युनिटी के सदस्यों से वास्तविक मुलाक़ात की ..'.सृजन का सहयोग'....जिसको आभा जी चलती हैं ...एवं राजेश जी के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन सफल हो सका ...सभी लोग एक दुसरे से रूबरू हुए ....अपनी अपनी रचनाएँ सुनाईं गईं ...और अंत में एक शानदार रात्रि भोज का आयोजन किया गया ...सभी लोग एक दूसरे से मिल कर बहुत प्रसन्न हुए ... कभी सोचा भी नहीं था की इस तरह से हम लोग मिल पाएँगे ...

7 टिप्‍पणियां:

  1. ऑरकुट की कम्युनिटी के सदस्यों से वास्तविक मुलाक़ात- यह भी खूब रही. देखकर अच्छा लगा.

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह !! बहुत अच्‍छा लगा होगा आप सबों को।

    उत्तर देंहटाएं
  3. तसवीरें बयां कर रही हैं ख़ुशी का राज़ ....जानकार बहुत अच्छा लगा की कम्युनिटी वाले लोग यूँ मिले

    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर चित्रों के साथ 'सृजन का सहयोग' सराहनीय प्रयास है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. यह तो बहुत अच्‍छा रहा। हमें भी अच्‍छा लगा जानकर।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया लगा यह तो ..मिलना मिलाना तो यूँ होना ही चाहिए ..

    उत्तर देंहटाएं
  7. तो दिल्‍ली में मिले सब

    बेदिलों को कूट दिया।

    उत्तर देंहटाएं