बुधवार, 6 मई 2009

आज एक चुनावी कविता.....

 हमारी हुकूमत में आम आदमी की आमदनी बढ़ी....मन मोहन सिंह 

हमने बढाई महंगाई 
हमपे लगी है यह तोहमत  
सच बात तो यह है कि 
जब जब आई हमारी हुकूमत  
आम आदमी से हमने करी   
टूट कर इतनी मुहब्बत  
आमदनी को उसकी  
कर दिया इतना ऊँचा  
देख ही ना पाया वो   
जिसकी पीठ पर लदा हुआ था  
आटे दाल का बोझा  ....
 

12 टिप्‍पणियां:

  1. सही है..चुनाव खत्म हों तो आपकी बाकी रचनाऐं पढ़ने मिले. :)

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  2. प्रजातन्त्र ही ढोये भार दाल-आटे का।
    किये करोड़ो खर्च बजट लाये घाटे का।।
    आम आदमी झेल रहा है मँगाई की मार।
    नेता जी के घर में आयी नये नवेली कार।।

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