रविवार, 23 अगस्त 2009

टीचरनी का ब्लॉग

साथियों ये मेरा नया ब्लॉग है ....इसमे आपको एक टीचर के अनुभव और उसके विचार पढने को मिलेंगे ... फिलहाल कुछ फुटकर लाइनें
टाफियों के छिलके
चिडियों के पर
टूटे खिलोनों के टुकड़े
और एक कागज़ की नाव
कितना खूबसूरत है
छोटे बच्चे का गाँव ...

3 टिप्‍पणियां:

  1. अति भावपूर्ण और प्रभावपूर्ण भी !
    बधाई , शेफाली जी !

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  2. टाफियों के छिलके
    चिडियों के पर
    टूटे खिलोनों के टुकड़े
    और एक कागज़ की नाव
    कितना खूबसूरत है
    छोटे बच्चे का गाँव ..
    ...आपकी बहुत सी कविताएं पढ़ी..सीधी-सादी, सरल-सच्ची अभिव्यक्ति अच्छी लगी। ये पंक्तियाँ..लाज़वाब हैं।

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