बुधवार, 2 सितंबर 2009

मेरे सपने ....

हर आवाज़ पे मचल जाते हैं

हर आहट पे सिमट जाते हैं

मेरे सपने भी फुटपाथ के बच्चों से हैं

कोई प्यार का टुकडा फेंके तो

क़दमों से लिपट जाते हैं

12 टिप्‍पणियां:

  1. achha hai !lekin yun kadmon se lipatna thik nahin hota!laplapati duniya ke pas tukdon ki kami nahin hai.fir bhee nayi soch ke liye ,badhai!!

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  2. अच्छा जी चुपके चुपके यहां मास्टरनी बन गयी हैं आप..आप कुछ भी बनें हमसे छुप कर कहां जाइयेगा..चर्चा में सबको बता दिया है..और हां..जल्दी ही लिंक भेजूंगा आपको...ये अपने ब्लोग को खुद ही फ़ौलो क्यूं..किया ...हम हैं न....

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  3. वाह!नया ब्लॉग....मैंने तो देखा ही नही था ..सुन्दर भाव है ..एकदम निश्छल ..बहुत सुन्दर

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  4. मेरे सपने भी फुटपाथ के बच्चों से हैं
    कोई प्यार का टुकडा फेंके तो
    क़दमों से लिपट जाते हैं

    बहुत सुन्दर

    पढ़वाने के लिए आभार

    वीनस केसरी

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  5. सिमट जाते हैं फिर
    पलटकर आते भी तो हैं?
    सड़क पार करते सपने
    कल की छूटी उधार
    बहार जाते हैं, मुरझाये
    मन को फीकी हंसियों
    संवार जाते हैं.. ?

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  6. Achcha likhana achchce ehsaas ki nishaani hai...aapka ehsaas aur bhi zameeni ho...
    Aapka Neelesh, Mumbai
    http://www.yoursaarathi.blogspot.com/

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  7. बहुत आसान है वर्ड वेरीफिकेशन हटाना

    Settings > Comments .> Comment moderation = Never
    और फिर Save

    :-)

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  8. मेरे सपने भी फुटपाथ के बच्चों से हैं
    कोई प्यार का टुकडा फेंके तो
    क़दमों से लिपट जाते है ..
    बहुत सुंदर ....
    रूह को छू लिया दिल से निकले आपके शब्दों ने..... मक्

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  9. बेहतरीन
    वाह
    कोई प्यार का टुकडा फेंके तो
    क़दमों से लिपट जाते हैं
    प्यार तो ऐसा ही होता है

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