मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

उसने कहा था .....

उसने कहा था .....

उसने कहा ......अभिव्यक्ति ।
उन्होंने कहा .....अभी वक्त नहीं ।
उसने कहा ........धर्मनिरपेक्षता ।
उन्होंने कहा .......धर्म पर देश टिका ।
उसने कहा .........मेरी विश्वरूपम देखो ।
उन्होंने कहा ........हमारा विषवमन देखो ।
उसने कहा .........मैंने सैंसर बोर्ड से पास कराई ।
उन्होंने कहा ........हमारे कैंसर बोर्ड को दिखाई ?
उसने कहा ...........आखिरकार, मैं गया हार ।
उन्होंने कहा ..........पकड़ो छुरी, तेज़ करो धार ।
इसको जगह - जगह से काटो डालो ।
जो हमें पसंद ना आए, हर उस दृश्य को छांट डालो ।  
उसने कहा ...........एक बार फिर कला शर्मसार हो गयी है ।
उन्होंने कहा .........पिक्चर भी तार - तार हो गयी है ।
हाँ ! लेकिन अब यह प्रदर्शन को पूरी तरह से तैयार हो गयी है ।

10 टिप्‍पणियां:

  1. तुम भी कमाल हो :)
    क्या मस्त समीक्षा है .

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  2. अपने देश के आजकल यही हाल है !


    ब्लॉग बुलेटिन: ताकि आपकी गैस न निकले - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. सुन्दर समीक्षा | फिल्म अभी देखि नहीं मैंने पर देखना ज़रूर चाहूँगा जल्दी ही |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  4. उसकी तो किसी ने सुनी ही नहीं
    उन्होंने मिलके गला दबा दिया....

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