शुक्रवार, 10 मई 2013

मामा - मामा भूख लगी..........

 डिस्क्लेमर ........इसका रेल, बस या हवाईजाहज .... किसी भी घोटाले से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है । 

जैसा राजा वैसी प्रजा । जैसे छात्र वैसे प्रश्न ।

प्रश्न ......निम्न पंक्तियों की व्याख्या करो । 

मामा - मामा भूख लगी, खा ले बेटा मूंगफली । मूंगफली में दाना नहीं, हम तुम्हारे मामा नहीं ।

व्याख्या .....प्रस्तुत पंक्तियों में एक मामा  है दूसरा उसका भांजा ।

इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है कि भांजा भूख लगने पर अपनी माँ को याद नहीं करता । वह खाने के बारे में सिर्फ मामा से बात करता था ।

माँ पोषक तत्वों से भरपूर खाना देती थी, जिसमे बेटे को स्वाद नहीं आता था । इसके विपरीत मामा तर माल खाया करता था, जिसे देख कर भांजे का जी ललचाया करता था ।
 
मामा एक हाथ में काजू, बादाम रखता था और दूसरे हाथ में मूंगफली, वह भी बिना दानों की । पब्लिक और भांजे को दिखने के लिए वह बिना दानों वाली मूंगफली खाता था ।

भांजा धोखाधड़ी की शिकायत करता था तो वह फ़ौरन ''हम तुम्हारे मामा नहीं '' कहकर भांजे से नाता तोड़ लेता था ।

चन्दा मामा दूर के ........

प्रस्तुत पंक्तियों में कहा गया है कि चंद मामा लोग मालामाल होते ही अपने रिश्तेदारों ख़ास तौर से भांजों से दूरी बना लेते था । कवि मामा के द्वारा पैदा की गयी इस दूरी की तुलना चाँद से कर रहा है ।

रिश्तेदारों से दूर होते ही मामा के घर में तरह तरह के पकवान बनने लगते हैं । इन पकवानों में सबसे प्रमुख पकवान पुआ होता है ।

इन पुओं से आती खुशबू दूर - दूर तक फ़ैल जाती थी । पुओं से आने वाली इस सुगंध को सूंघकर भांजों के नथुने फड़कने लगते थे । वे बैचैन होकर माँ से मामा के पास जाने की सिफारिश लगवाया करते थे । सभी रिश्तेदारों के पास किसी ना किसी प्रकार का पास उपलब्ध था । 

मामा के पास उड़नखटोले का मंत्रालय था । मंत्रालय पी. पी. पी. अर्थात  पैसा, प्रमोशन, पावर मोड़ में चल रहा था । काफी मलाईदार मंत्रालय था ।  इसमें दूध - मलाई खाने की संभावना काफी प्रबल थी । दूध - मलाई के नाम से भांजों की लार टपक जाती थी ।

भांजा, मामा को सच्चे दिल से प्यार करता था जबकि मामा, भांजे के साथ बहुत पक्षपात करता था । 

मामा खुद तो थाली में खाता था वह भी भर - भर के । भांजे को प्यालियों में मिलता था । प्यालियाँ काफी कच्ची होती थीं । इन प्यालियों में उड़नखटोले के यात्रियों को भोजन परोसा जाता था । इन्हें चीन से मंगवाया जाता था । ये पकड़ते ही टूट जातीं थीं ।

मामा को उड़नखटोले का खाना खाने की आदत थी । मामा का हाजमा दुरुस्त था । उसका पेट कभी खराब नहीं होता था । इसके विपरीत भांजे का हाजमा घर का खाना  खाने के कारण काफी कमज़ोर था । 

भांजा सोचता था अब तो प्याली टूट गयी अब मामा के साथ खाने को मिलगा या मामा जैसी थाली में खाने को मिलेगा । लेकिन मामा नई प्याली ले आता था और ताली बजा बजा के भांजे का मज़ाक उड़ाता था । 

मामा का मुन्ने को मनाने का तरीका भी बहुत ही विचित्र हुआ करता था ।'' मुन्ने को मनाएंगे , दूध मलाई खाएंगे '' इन पंक्तियों में'' खिलाएंगे'' के स्थान पर'' खाएंगे'' आया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामा  दूध - मलाई खुद खाता था और कहता था कि रूठे हुए मुन्ने को ऐसे ही मनाया जाता है । ऐसा लगता है कि मामा के मुंह पर लगी हुई मलाई को देखकर मुन्ना खुश हो जाता होगा कि वह भी बड़ा होकर इसी प्रकार दूध - मलाई खाया करेगा । 

 उड़नखटोला मंत्रालय में नाना प्रकार के खेल खेले जाते थे ।  इन खेलों में आंखमिचौली का खेल सर्वप्रमुख था । जिसका प्रमोशन लिस्ट में नाम होता था,  उसकी जगह किसी और का प्रमोशन हो जाता था । प्रमोशन के लिए कम पैसा लाने वालों के साथ छुप्पन  - छुपाई का खेल खेल जाता था । धीरे - धीरे भांजा इस प्रकार के खेलों में पारंगत होता गया ।

आंखमिचौली का खेल ईमानदारी से ना खेला जाए तो बड़ी गड़बड़ होने की संभावना प्रबल हो जाती है । सबकी आँखें खुली रहें और एक की आँख बंद रहे तो खेल लम्बे समय तक चलता है ।

तीसरी  व्याख्या .......

चन्दा मामा से प्यारा मेरा मामा .......प्रस्तुत पंक्तियों से स्पस्ट होता है कि लडकियां बचपन से ही चतुर - चालाक होती हैं । मीठी - मीठी बातें करके मामा को पटाती रहती हैं । वे दहेज़ के माध्यम से माल मत्ता लेती हैं जिससे किसी को शक नहीं होता । इससे साबित होता है कि इस संसार में जिसकी नेचुरल इंस्टिंक्ट तेज नहीं होती वह अननेचुरल स्टिंग में पकड़ा जा सकता है । 
 

10 टिप्‍पणियां:

  1. पिता के पुत्र, ताऊ के भतीजे, मामा के भांजे यदि मालपुए नही खायेंगे तो फ़िर कौन खायेगा? पिता ताऊ मामा का अकाऊंट भी तो भांजे भतीजों के माध्यम से ही भरता है ना?:)

    बहुत सटाकेदार व्यंग.

    रामराम.

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(11-5-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  3. :):) तुम भी न ..पढ़ने दो जरा इसे मामा को :)

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  4. अद्भुत व्याख्यायें है कविताओं की। जय हो!

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  5. मैंने भी इसे ऐसे ही पढ़ा है कि जैसे इसका रेल, बस या हवाईजाहज .... किसी भी घोटाले से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है

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  6. सुन्दर व्याख्याएं. बगैर दाने की मूंगफल्ली तो जनता को ही खानी है.

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  7. कमाल के अर्थ किये हैं बच्चों ने :) कित्ते समझदार हो गये हैं :) मामा-भांजे का रिश्ता तो हमेशा से ऐसा ही है :( मौसियां जितनी सगी होती हैं, मामे उतने ही बदमाश :) साबित भी हो रहा लगातार :)

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  8. अब तो चाँद निकलना भी बन्द कर देगा, हम ही कहीं न दाग़ लगा दें उस पर।

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