रविवार, 18 मई 2014

उनका और इनका …

उन्हें -
हार मिले 

इन्हें -
हार मिली । 

उन्हें -
जनादेश हुआ 

इन्हें - 
जाने का 
आदेश हुआ । 

उन्होंने -
भारी 
मत पाए 

इन्होने -
भारी 
मन पाए । 

उनका -
बढ़ गया 
जनाधार 

इनका -
जन ने किया 
बंटाधार । 

उनके -
चौखट 
ढोल बाजे 

इनके -
चौखटे 
बारह बाजे । 

उनके  -
गठबंधन का 
पव्वा हाई 

इनका -
ठगबंधन 
हवा - हवाई । 

उनकी - 
होली, दीवाली 
अबीर, गुलाल 

इनका -
मुहर्रम, मातम 
गाल शर्म से लाल । 

उनको -
जनता ने 
माफ़ किया 

इनको -
जनता ने
साफ़ किया । 

उनके -
हाथ युवा 
जोश 

इनके -
साथ युवा 
रोष । 

वे - 
चढ़ेंगे 
सिंहासन 

ये  -
करेंगे 
शीर्षासन । 

उधर -
पंजा - पंजा 
कमल हो गया 

इधर -
पंजा - पंजा 
कलम हो गया । 

6 टिप्‍पणियां:

  1. वैसे होना जैसा तो नहीं था
    पर वाकई गजब हो गया
    बस इतनी तमन्ना है
    ना कहना पड़े बाद में
    किसी को हाय हाय
    या रब ये क्या हो गया :)

    बहुत सुंदर लिखा है ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (19-05-2014) को "मिलेगा सम्मान देख लेना" (चर्चा मंच-1617) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अपना अपना नज़रिया - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. ऐसा तो होना ही था किसी एक के साथ

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