सोमवार, 19 मई 2014

चुनावी क्षणिकाएँ

चुनावी क्षणिकाएँ 

वे 
बताएँगे
अपनी हार का कारण
कड़कती धूप,
कम मतदान,
वोटर का रुझान
और
उदासीनों का
वे क्या करते
श्रीमान ?
सच भी ये 
क्यूंकि 
आज भी 
महात्मा गांधी है 
मजबूरी का 
दूजा नाम । 

वे 
दिखाएंगे 
पूरी ईमानदारी 
स्वीकार करेंगे 
हार की ज़िम्मेदारी 
जनता के फैसले का 
करेंगे स्वागत 'औ 'सम्मान 
क्यूंकि 
आज भी 
महात्मा गांधी है 
मजबूरी का 
दूजा नाम । 

 वे 
करेंगे हार के 
कारणों की समीक्षा 
मजबूरन 
पाँच साल तक 
मौके की प्रतीक्षा 
सबके 
सिरों को जोड़ेंगे 
फिर ठीकरों को 
फोड़ेंगे 
साफ़ बचेगा 
हाईकमान 
क्यूंकि 
आज भी 
महात्मा गांधी है 
मजबूरी का 
दूजा नाम ।     [मास्टरनी ]









7 टिप्‍पणियां:

  1. और भजेंगे वैष्णव जन तो तैने कहिये
    रखकर बगल में छुरी मुँँह में राम :)

    बहुत सुंदर वाह ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (20-05-2014) को "जिम्मेदारी निभाना होगा" (चर्चा मंच-1618) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. बेहद उम्दा सामयिक रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@आप की जब थी जरुरत आपने धोखा दिया (नई ऑडियो रिकार्डिंग)

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  4. और जीतने वालों पर लगायेंगे सच्चे झूटे आरोप।

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