मंगलवार, 30 मई 2017

एंटी रोमियो स्क्वाड से बचने के तरीके ----


इधर यू पी में योगी ने सत्ता संभाली उधर रोमियो टाइप के लोगो की शामत आ गयी | हांलाकि रोमियो की आत्मा चीखती रही कि मेरा नाम इस स्क्वाड वगैरह में मत घसीटो | मैंने बस जूलियट से ही प्यार किया था | मैंने किसी भी लड़की को नहीं छेड़ा, लेकिन सरकारें जब किसी जिन्दा आदमी की नहीं सुनती तो फिर रोमियो की आत्मा की क्या विसात ?

हो यह रहा है कि इस स्क्वाड के बावजूद यू पी में मनचलों की छेड़छाड़ जारी है | उसी तरह से जिस तरह से तमाम तरह के क़ानून होने के बावजूद बलात्कार, भ्रष्टाचार और अन्य अपराध जारी हैं | कहना चाहिए कि कानून बनने के बाद अपराध ज़्यादा होने लगते हैं और खुलेआम होने लगते हैं | 

स्क्वाड से कहा गया कि प्रेमी जोड़ों को परेशान नहीं करना है | छेड़छाड़ करता हुआ जो पाया जाए उसे ही निपटाया जाय | लेकिन हुआ यह कि सरकारी स्क्वाड से प्रेरित होकर कुछ स्वयंसेवक भी इस पुनीत कर्तव्य का पालन करने के लिए मैदान में उतर आए | अब ये स्वयंभू स्क्वाड प्रेमी जोड़ों को सरेआम पीट रहे हैं | छेड़खानी करने वाले छेड़ कर भाग जा रहे हैं और प्रेमी जोड़े इनके हत्थे चढ़ जा रहे हैं | 

प्रेमी अगर वास्तव में प्रेम करना चाहते हैं तो उन्हें प्रेम करने के सदियों से चले आ रहे तरीकों को तिलांजलि देनी होगी और नए हथकंडे अपनाने होंगे | प्रेमी जोड़ों को मिलने की जगह के बारे में अपनी परंपरागत सोच को बदलना होगा | बाग़ - बगीचे, रेस्त्रां, होटल, कॉफी शॉप, पिक्चर हॉल, नदी या समुन्दर किनारे मिलने के बजाय ऐसी जगहों के बारे में सोचना होगा जहाँ ये स्क्वाड वाले पर भी न मार सकें | 

इसके लिए सब्ज़ी बाज़ार, राशन की दुकान , बिजली, पानी के बिल भरने की लाइन, पोस्ट ऑफिस में नौकरी के फॉर्म जमा करने के लिए लगने वाली तीन - चार किलोमीटर लम्बी लाइन में सबसे पीछे लगा जा सकता है | यह प्रेमियों को दो - तीन घंटे साथ में बिताने का भरपूर मौका देता है | साप्ताहिक हाट बाजार, तहसील, कोर्ट भी मिलने के लिए मुफीद स्थान हैं | सत्संग, धार्मिक कथाएं, भजन, जगराते भी काफी हद तक सुरक्षित कहे जा सकते हैं बशर्ते प्रेमियों के अंदर सदियों से चली आ रही धार्मिक बातें सुनने और कर्णफोड़ू संगीत को सुनने का माद्दा हो | न भी हो तो प्रेक्टिस करके सीखा जा सकता है | प्रेम सब कुछ सिखा देता है | 

प्रेमी जोड़ों को सवारी के विषय में भी सावधानी बरतनी होगी | वे भूल कर भी बाइक पर न बैठें | प्रेमी बाइक से उसी प्रकार दूरी बना लें जिस प्रकार शादी के बाद पति - पत्नी प्यार नामक शब्द से दूरी बना लेते हैं | अगर घर में कोई पुराना स्कूटर या साइकिल न हो और बाइक में बैठना ही एकमात्र विकल्प हो तो ऐसे बैठें जैसे कि जैसे दोनों के बीच से एक हाईटेंशन तार गुज़र रहा हो और गलती से भी एक दूसरे को छू लिया तो 440 वोल्ट का करेंट लग जाएगा | कम से कम इतनी दूरी बनाए रखें कि दोनों के बीच में एक गैस का सिलेंडर आराम से आ जाए | प्रेमी जोड़े लोकल बस में धक्के खाते हुए सफर करें | टेम्पो, इक्का, रिक्शॉ जैसी सवरियों का प्रयोग भी ठीक रहेगा | 

प्रेमी जोड़े शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतें | प्रेम प्यार, दिलबर, जानू, स्वीटी, हनी, मुन्ना, बेबी, डार्लिंग जैसे शब्दों से उसी प्रकार दूरी बना लें जैसे शुगर की बीमारी वाले मीठे से और ब्लड प्रेशर की बीमारी वाले नमक से दूरी बना लेते हैं | 

आपस में बातचीत करते समय हाई एलर्ट रहें | प्राचीन काल में दीवारों के भी कान होते थे | आजकल दीवारों के पास कान के साथ - साथ हाथ - पैर, डंडे, तमंचे भी होने लगे हैं | ऐसे में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता हो जाती है | प्रेमी जन बार - बार शब्द बदल - बदल कर एक ही तरह की बात करें | सारी बातों का निचोड़ यही होना चाहिए कि '' इसके साथ होने से आपकी ज़िंदगी बर्बाद हो गयी है ''| प्रेमिका इस तरह के डायलॉग कंठस्थ कर लें -क्या किस्मत पाई है मैंने ! मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है ? पिछले जन्म में क्या पाप किये होंगे मैंने ?मैंने तो कभी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा फिर मेरे ही साथ ऐसा क्यों हुआ? इत्यादि इत्यादि | 

प्रेमी भी ऐसे संवाद रट ले तो स्क्वाड वाले तनिक भी शक नहीं करेंगे --''इन लड़कियों को तो ऊपर वाला भी नहीं समझ पाया फिर मेरी क्या हस्ती ? तिरया चरित्र साला | अभी ये लक्षण हैं तो शादी के बाद पता नहीं क्या होगा ? पता नहीं क्या देखा इसमें ? ' दिल आया गधी पर तो ----| कुछ भी कर लो कभी खुश नहीं होगी''| प्रेमिका जब प्रेम की बातें करना चाहे तो प्रेमी ठीक उसी समय राष्ट्रीय और अंतररष्ट्रीय चिंतन में व्यस्त हो जाए | आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, परमाणु हमला, ओजोन परत, ग्लोबल वार्मिंग के मुददे पर गंभीरता पूर्वक मनन करने लग जाए |

प्रेमी जोड़ों को भाव भंगिमा के क्षेत्र में थोड़ी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी | शर्माना, सकुचाना, इधर उधर देखना, हथेलियों में मुंह छिपा लेना, पल्लू या दुपट्टे का कोना मरोड़ना, हलके से मुस्कुराना, आँखें झपकाना जैसी फूहड़ और घटिया हरकतें बंद करनी होंगी | इनके स्थान पर परेशानी, खिन्नता, ऊब को चेहरे का स्थाई भाव बना लें | ज़िंदगी बर्बाद, पश्चाताप, फूटी किस्मत, दुर्भाग्य जैसे शब्दों का सुबह - शाम जाप करते रहें | इन मन्त्रों का लगातार जाप करने से चेहरे पर वैसे ही भाव आ जाते हैं | दोनों एक दूसरे की आँखों में आँखें डालने की गलती बिलकुल न करें | प्रेमी जब आकाश तो देखे तो प्रेमिका को पाताल की ओर देखना चाहिए | एक उत्तर की ओर देखे तो दूसरा पश्चिम को देखे |   

आशा करती हूँ कि इन उपायों को अपनाने के बाद प्रेमी जोड़े स्क्वाड के हत्थे पड़ने से बच जाएंगे और माता - पिता बिना दहेज़ दान के अपनी कन्याओं का कन्यादान कर पाएंगे | 

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज गुरूवार (01-06-2017) को
    "देखो मेरा पागलपन" (चर्चा अंक-2637)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं