शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2009

लो आया बचत का मौसम ....

मंत्रियों  ने होटल छोडे , 
हर गली में बबुआ डोले 
लो आया बचत का मौसम 
नए अंदाज़  का मौसम .......बचत के इस सीजन में देखिये ऊपर वाले के यहाँ क्या चल रहा है ?
 
 
ईश्वर - चित्रगुप्त से .....
बताओ चित्रगुप्त ! पृथ्वी पर क्या चल रहा है ?
चित्रगुप्त .....महाराज ! पृथ्वी तो मात्र चल रही है , लेकिन भारत वर्ष दौड़ रहा है।
 
ईश्वर ...वो कैसे ? पहेली मत बुझाओ, साफ़ साफ़ कहो।

चित्रगुप्त ...पूरा भारतवर्ष इस समय बचत की चपेट में है।

 
ईश्वर ....ये कौन सी नई बीमारी है ? हमने तो लेटेस्ट स्वाइन फ्लू भेजी थी , इसमें ज़रूर विदेशी ताकतों का हाथ है ।
.चित्रगुप्त ..महाराज इसके कीटाणु बहुत तेजी से फैलते हैं, इससे ग्रस्त होने पर इंसान के अन्दर बचत करने की भावनाएं जोर मारने लगती हैं।.
 
ईश्वर  ...अच्छा !! इसका मतलब मैं ये समझूं कि मंत्रियों और नेताओं ने हवाई जहाज से उड़ना छोड़ दिया है?
चित्रगुप्त....नहीं महाराज, ये आपने कैसे सोच लिया ? भारत वर्ष में जो ज़मीन से जितना ऊपर उड़ान भरता है , उसकी जड़ें ज़मीन में उतनी गहरी होती जाती हैं। हाँ यह अवश्य हुआ है कि अब वे लोग आम इंसान यानि कि जानवर के साथ सफ़र करने में शर्मिन्दा नहीं हो रहे हैं । ये लोग उड़ भले ही हवा में रहे हों , लेकिन खाना ज़मीन पर, वो भी गरीब के घर खा रहे हैं । समाजवाद का समाजवाद , बचत की बचत ,पाँचों उंगलियां कढाई में और सिर हेंडपंप  के नीचे।.
 
ईश्वर .....और कौन कौन बचत में सहयोग कर रहा है ?
चित्रगुप्त....सारी पार्टियां ....यथा ...भाजपा ,  और बसपा ..।.
 
ईश्वर .....क्या मायावती ने चंदा माँगना और हीरे ज़वाहरात, बंगले खरीदने बंद कर दिए हैं ?और भाजपा  ने कुर्सी का मोह त्याग  दिया है ?
चित्रगुप्त .....महाराज ! मायावती ने  एक मूर्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी खोल ली है ,  जिसमे सिर्फ उसकी ही मूर्तियाँ बनाईं  जाएँगी। अब जनता अपनी फरियाद लेकर अपने गली और मोहल्ले की मूर्ति के पास चली जाया करेगी , इससे मायावती के अनमोल समय की बचत  होगी। परिणामस्वरूप वह
अपने जन्मदिन का  सेलिब्रेशन  धूम - धाम से कर सकेगी ।

 और भाजपाई तो सिर से लेकर पैर तक बचत रस से सराबोर चल रहे हैं । नेताओं की बचत तो अपने - आप ही हो गयी। बाकी बचत वे अपने बच्चों एवं रिश्तेदारों को टिकट देकर पूरी कर रहे हैं ,आजकल वहां 'दो टिकट पर एक फ्री' ऑफर चल रहा है।
   
ईश्वर... युवा शक्ति क्या कर रही है इस अभियान में?
चित्रगुप्त .... महाराज जवान लड़के और लडकियां भी इस बचत अभियान में बराबर सहयोग प्रदान कर रही हैं।
 
ईश्वर .....क्या वाकई ? क्या नवजवानों  ने  शादी - विवाह में होने वाला  दान- दहेज़ , बैंड - बाजा दिखावा , और आडम्बर बंद कर दिए हैं ?
चित्रगुप्त ....इन्होने तो बैंड का ही बाजा  बजा दिया . अब नवजवान लिव - इन यानी कि बिना विवाह किये साथ रह रहे हैं , जो इनसे महरूम रह गए वे समलैंगिक  हो गए हैं .ना होगी शादी , ना बजेगा बैंड , बचत ही बचत ...{ ईश्वर अपनी कुर्सी से गिरते - गिरते बचे }

 
ईश्वर ....वहां सुप्रीम कोर्ट नामक एक संस्था भी तो है , जो हर फ़टे  में अपनी टांग अडाती है , उसने इसका विरोध नहीं किया ?
चित्रगुप्त .....दरअसल सुप्रीम कोर्ट के कई वकील अपनी पत्नियों से त्रस्त हैं , वे अक्सर सरेआम कहते हैं कि पत्नी के चरणों में ही स्वर्ग जान लेना चाहिए .उन्हीं के अथक प्रयासों से यह संभव हो पाया।
 

 ईश्वर ....और कौन कौन इस कार्यक्रम में शामिल हैं ?राखी सावंत का नाम आजकल सुनने में नहीं आ रहा ?क्या उस भारतीय नारी की शादी करके बोलती बंद हो गयी है ?
चित्रगुप्त ....शादी का तो पता नहीं , लेकिन आजकल वह बच्चे पालना सीख रही है , ताकि बाद में क्रेच का एवं नौकर का  खर्चा बच सके .पहले कपडों की बचत करती थी अब पैसों की कर रही है ।

 
ईश्वर ...और मातृ  शक्ति ? वह  इस कार्यक्रम पीछे क्यों है ?
चित्रगुप्त .....महाराज , महिलाएं अपनी तरह से योगदान दे रही है यथा एक स्वाइन फ्लू वाला नकाब लगाकर वे लिपस्टिक , पाउडर, फेशिअल , क्रीम इत्यादि नाना प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों पर होने वाला खर्चा बचा रही हैं ।

 
ईश्वर ....शिक्षा के मंदिरों यानि स्कूलों में इस दिशा  में क्या चल रहा है ?
चित्रगुप्त .....वहां सी. बी. एस. सी. ने नम्बरों की बचत करके ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया है। अब कोई फेल  नहीं होगा

 
ईश्वर ...अरे वाह ! तो अब से कोई बच्चा फेल  होने की वजह से आत्महत्या नहीं करेगा ।

चित्रगुप्त ...हाँ महाराज ! अब बच्चे फ़ेल होने की  वजह से नहीं बल्कि  ग्रेडिंग कम होने की वजह से आत्महत्या कर सकेंग। इससे फेल होने पर भी आत्महत्या का स्टेंडर्ड मेंटेन रहता है ।

 
ईश्वर ...और चित्रगुप्त , समाज के ठेकेदार ....कवि और साहित्यकार इस दिशा में क्या कर रहे हैं ?
चित्रगुप्त .....महाराज , कवि गण मंचों पर फूहड़ चुटकुले सुनाकर  कविताओं की बचत कर रहे है , लेखक लोग मुद्दों की बचत कर रहे हैं ..स्त्री शरीर ...और स्त्री - पुरुष के जटिल संबंधों के अलावा और कुछ नहीं लिख रहे हैं ।

 
ईश्वर ....और बुद्धू बक्सा ?
चित्रगुप्त ....महाराज ! यहाँ बचत की बहुत संभावना है , आजकल एक बड़ा सा खेत और चार - पांच लड़कियों को एकत्र कर लिया जाता है , एक ही कहानी को अलग - अलग तरीके से फिल्माया जाता है ,या कभी उब गए तो  टेस्ट बदलने को ८ - १० तथाकथिक मशहूर लोगों को एक कमरे में बंद करके एक दूसरे पर छोड़ दिया जाता है , इसमें न हींग लगती है ना फिटकरी और रंग चोखा ही चोखा। डायलोग, स्क्रिप्ट ,ऐक्टिंग सबकी बचत।.  इसमें सिर्फ साउंड का खर्चा आता है, कार्यक्रम की सफलता  ज्यादा  से ज्यादा ढोल - नगाडों की आवाज़ पर निर्भर करती है।
 
ईश्वर ...और मास्टर ? समाज का निर्माता , उसका क्या योगदान है ?उसने बच्चों का मिड डे मील खाना छोड़ा या नहीं ?
चित्रगुप्त ...महाराज ! हमने  हर संभव उपाय किये , कभी मेंढक तो कभी साँप खाने में डाले ,लेकिन यह पता नहीं किस मिटटी का बना है इस पर किसी का कुछ असर नहीं हुआ। बचत के नाम पर पेन बच्चों से मांगता है । बीड़ी तक शेयर करके पीता  है। इसे  समय की बचत में महारथ हासिल है । कक्षा में १० मिनट देरी से जाता है । १० मिनट पहले आ जाता है । भरी बस में कंडक्टर के द्बारा बेइज्ज्ती करने पर भी आधा ही टिकट देता है।
 
ईश्वर ... और इधर   ब्लागर नाम की एक नई प्रजाति विकसित हुई है , जो स्वयं  को बहुत फन्ने खां समझती  है। उन्होंने कुछ किया या हमेशा की तरह सिर - फुटव्वल में ही वक्त गुजार दिया ?
चित्रगुप्त ....महाराज ! ब्लागर पोस्ट की बचत कर रहे हैं , वे टिप्पणियों पर नज़र रखते हैं ,और टिप्पणियों पर ही पोस्ट लिख रहे हैं.
 
 ईश्वर ...और आम आदमी ? क्या वह अभी भी दो वक्त का खाना खा रहा है ?
चित्रगुप्त .....उसके तो अंदाज़ हे अनोखे हैं। पानी में हल्दी घोल कर दाल  समझ कर पी जाता है। बड़े - बड़े लोग कहते है कि एक घंटा बत्ती बंद करनी चाहिए तो वह गर्मी की रातें मच्छरों   के बीच गुजार देता है। वे कहते है पानी बचाओ , तो वह नहाना बंद कर देता है। वे कहते हैं कि पर्यावरण बचाओ तो वह  डर के मारे सारा जीवन टूटी साइकिल से स्कूटर पर नहीं आ पाता।
और क्या बताऊं, बुड्ढे लोगों के भी मुँह में मास्क लगे हुए हैं ताकि खाने को देखकर उनके मुँह में लार  ना टपकने लग जाए , बुढ़िया औरतें किसी ना किसी बहाने से  हफ्ते में चार दिन व्रत - उपवास रख रही हैं।

 
ईश्वर .... चित्रगुप्त, तुमने तो मेरी आँखें ही खोल दीं ..अब हमें भी बचत करनी चाहिए ...मैं अभी आदेश पंजिका में बचत करने के आदेश निकलवाता हूँ .आज से सारे नाच गाने , मौज मस्ती बंद।
 
चित्रगुप्त फ़ाइलें और अपना मुंह लटकाये हुये बाहर आते हैं। सभी देवतागण उनको घेरकर उनके खिलाफ़ नारे लगाने लगते हैं कि इतना भी सच बताने की क्या जरूरत थी। धर्मराज ने अपने काम का अपहरण चित्रगुप्त द्वारा किये जाने की बात कहकर उनके खिलाफ़ मानहानि का मुकदमा ठोक दिया है। 

 

24 टिप्‍पणियां:

  1. बचत की झन्‍नाटेदार चपत
    टिप्‍पणी की पोस्‍ट बनाने वाले ब्‍लॉगर सावधान
    चटपटी बचत या झटपटी चपत।

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  2. बिल्कुल ठीक किया
    मुक्कदमा होना भी चाहिये था
    ईश्वर को भी अक्ल आने लगी है लगता है

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  3. हर बार की तरह इस बार भी तीखा व्यंग्य...

    एक ही पोस्ट में कईयों को लपेट दिया...याने कि बचत ही बचत राष्ट्रीय बचत

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  4. जे बात ..अब देखिये कितनी पार्टी आप पर डी फेम का मुकदमा ठोकती है .....वैसे सुना है यू पी के कोषाध्यक्ष भी किसी घपले की वजह से हटाये गए है

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  5. ऐसा ही सच सच लिखती रहेंगी तो लोग आपको भी घेर के आपके खिलाफ़ नारेबाज़ी करेंगे।

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  6. सुन्दर पोस्ट है।

    जन्म-दिवस पर
    महात्मा गांधी जी और
    पं.लालबहादुर शास्त्री जी को नमन।

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  7. जबरदस्त व्यंग्य. मै भी खर्च की डायटिंग के बारे मे सोचने लगा.

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  8. राखी सावंत पहले कपडों की बचत करती थी अब पैसों की कर रही है...
    भागवन ने भी उसे अक्ल देते समय भयंकर बचत अभियान चला रखा था शायद..

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  9. हांय आजकल चित्रगुप्त और इश्वर भी इसी काम में लगे हैं.....मा साब आप जो न करें..बताईये तो ..अब हो गया उपर का हिसाब किताब..इश्वर से कहिये ..कुछ दिनों के लिये ..बिग बौस में शामिल हो जायें..बिग बी के साथ...तबियत भी ठीक रहेगी उनकी...हां बेचारे उन ब्लोग्गर्स पर तो निरा तुषारापात किया आपने..बताईये..अब वे क्या करेंगे..कहां से लायेंगे आईडिया..अब मियां हलकान की डायरी हर किसी के हाथ तो आने से रही...बाप रे कोई इसी टीप को मुद्दा न बना ले..चलता हूं...

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  10. गान्धी जयंती पर यह व्यंग्य सही है ।

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  11. लाजवाब व्यंग्य.....एक ही पोस्ट में सबको लपेट लिया ।

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  12. ब्लॉगलोक में जहां चोट्टे और चोट्टियों की बोलबाला हैं दूसरे का माल उड़ाकर अपना ठप्पा लगा ठेल कर रहे हैं.

    चेले और चेलियां गुरु की लंगोटी में सिद्ध प्राप्त कर रहे हैं बदले गुरु कविता खुद लिखकर अपनी प्रिये के नाम से छाप रहे हैं.
    अपने गिरोह से टिप्पड़ियां टिपवाकर ब्लागजगत के मदारी गदगद हैं.
    ब्लॉग सुंदरियों को कविता पर नहीं फोटो पर दाद लुटायी जा रही हो.
    वहाँ हे सत्यदेवी आप के सत्यवचनों को सुनकर हमें आशा बँधी है कि हमारे जैसे ब्लॉग जगत के पापियों का मोक्ष निकट ही है आपके श्रीचरणों मे लोटने को जी चाहता है.
    बोलो सत्यदेवी की जै.
    आपकी पोस्ट पर दूसरी बार आया हूँ आज अपने को रोक न सका.

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  13. बहुत कटाक्ष पूर्ण व्यंग...एक साथ बहुत सी बातें ली हैं...और सबके साथ न्याय किया है...

    मज़ा आया पढ़ कर....बधाई

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  14. धन्य हें मास्टरनी जी आप.
    एक ही तीर से कई शिकार ( नेता, मंत्री, युवा, टी वी कलाकार, अध्यापक, कवि, सहियकार और ब्लॉगर्स ) कर डाले,
    बहुत ही सटीक व्यंग है हमेशा की तरह.

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  15. आदरणीय सुभाष जी ...आप व्यंग्य कर रहे हैं या तारीफ ....समझ में नहीं आ रहा है ...यूँ तो हम श्रीमती हैं , हमारे चरणों पर लोटने को हमारे ही श्री काफ़ी हैं ....और किसी की हमें आवश्यकता नहीं है ...

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  16. बहुत मजेदार !!!!!!!!! शेफाली जी आप कहाँ तक पहुँच जाती हैं ? अरे भैया ! सुभाष जी को रोकिये ....वे तो बिल्कुलय आउट हो चुके हैं .

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  17. सुन्दर। कहां से कहां की बचत कर लेती हैं आप। धन्य हैं! इत्ती-इत्ती खुराफ़ात बचतों के बारे में आपै सोच सकती हैं। बधाई।

    सुभाषजी का तारीफ़ करने का यही अंदाज है। इसका बुरा न मानें।

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  18. आदरणीया शैफालीजी आपकी शैली व्यंग्यमय है सोचा उसी में बात करूँ पर आपने हमारे ब्लॉग पर आकर हमारे लोटने को प्राणी विशेष से जोड़कर हमारी वहां भी दवा कर दी.ख़ैर हमें आपका अंदाज़ पसन्द आया.
    सो सीधी सीधी कह रहे हैं कोई व्यंग्य नहीं.
    हमें आपकी चौतरफा मार पसन्द आयी.
    इसीलिए सत्यदेवी कहकर आपके श्रीचरणों में लोटकर दाद देदी.

    आप कुशल व्यंग्य लेखिका हैं फिर भी शब्दों को अभिदा में लेते हुए अर्थ घटन कर बैठीं. आपको पहुँचे किसी भी क्लेश के लिए क्षमा प्रार्थी हैं आशा हैं इसके उपयुक्त समझेंगी.
    अनूप भैया सही कह रहे हैं हम आपकी शैली ही नहीं सोच के भी प्रशंसक हैं.
    सुशीलाजी बिल्कुल सही कह रही हैं हम सचमुच आउटओफ डेट हैं. उनके लिए अपने शेर में कहूँ-

    मुझको पढ़ते अगर तो कोई बात थी,
    बिन पढ़े ही मेरा तब्सिरा लिख दिया.
    शेफालीजी आप हमारे ब्लॉग पर आयीं बहुत अच्छा लगा.
    धन्यवाद.



    व्यंग्य और ग़ज़ल हमारे लेखन की विधायें हैं.ग़ज़ल में काफिये रदीफ बहर की वंदिशें हमें नियंत्रण में रखती हैं व्यंग्य लेखन के खतरें बहुत हैं

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  19. शेफाली जी, आज की पृ्ष्ठ भूमि को मध्यनज़र रखते हुए आपने जिस व्यंग्यपूर्ण तरीके से अपनी सोच को रखा है उसके लिये आप को बधाई एवम शुभकामनाये. आपने तीरो की जो बारिश की है आशा है उस से कुछ लोगो की सोच भीगी होगी, शायद तीर चुभे भी हो.

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  20. चत पर बहुत अच्छा लिखा आपने.. देखिये ना इंस्पायर होके मैंने 'ब' की बचत कर ली..

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  21. फ़िर से बांचा बचत पुराण। फ़िर जय हो।

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