बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

करवा चौथ पर इन देवियों से मिलिए ...

उस घर में जब पहुँची मैं
अजब वहां का हाल था
वो बनी थी अंबे - दुर्गा
झगड़ा ही जिनका काम था 
 
बिखरे हुए थे सारे बाल 
आँखों में जलते थे अंगार 
भभूत लपेटी थी तन पे 
सिर पे सुशोभित चूनर लाल 
 
आँखों को घुमाया गोल - गोल 
एक नज़र में लिया सबको तोल 
उछल - उछल कर लगी नाचने 
थर - थर क्रोध से लगी काँपने 
 
" और जोर से बजाओ थाली 
मुझमें आ गयी शेरोंवाली 
मैं ही काली, कलकत्ते वाली 
मेरा वार ना जाए खाली "
 
किया जोर से अट्टहास 
रुक गयी सबकी पल में सांस 
सिंहासन से कूद कर 
नाचती आई घर वालों के पास 
 
हाथ - पैरों को ऐसे मरोड़ा 
देवर - जेठ का हाथ तोड़ा 
सास - ननद का पकड़ा झोंटा 
ससुर की पीठ पर जमाया सोटा 
चुप्पी साधे खड़ा था जो भी 
 फ़ौरन चरणों पर जा लोटा
 
पडोसिनों को मारी लात
थप्पड़ - घूसों की हुई बरसात
मेरी पूजा नहीं करोगी
सुन लो कलमुंही , कुल्च्छ्नियों
आजीवन रोती रहोगी
 
इतने में पति की आई याद
था दूर खड़ा वह दम को साध
"समझे खुद को प्राणनाथ
कुत्ते - कमीने ,और बदजात
वहां खड़ा है सहमा - सिमटा"
कहकर फेंका थाली, चिमटा
 
बोली सास कराह कर
लिखी भूमिका तूने इसकी
मैं करूंगी उपसंहार
जीत गयी तू अबकी, मैं गयी हूँ हार
जी भर के करवा ले अपनी जय जैकार
 अगली बार, लूंगी जब अवतार,
सात पुश्तें तेरी, करेंगी  हाहाकार ...
 
 
 
 
 
 
 
 
 
  

32 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा है।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    www.vyangya.blog.co.in

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  2. ''अगली बार जब लूंगी अवतार ,
    सात पुश्तें तेरी करेंगी हाहाकार''
    .........पेट में बल पड गए ,हंसते हंसते .......बधाई .

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  3. hahahahahahahahahahaha............

    hahahahahahahahahahahaha.............

    haahahahahahahahahahahahahaha............


    बोली सास कराह कर
    लिखी भूमिका तूने इसकी
    मैं करूंगी उपसंहार
    जीत गयी तू अबकी, मैं गयी हूँ हार
    जी भर के करवा ले अपनी जय जैकार
    अगली बार, लूंगी जब अवतार,
    सात पुश्तें तेरी, करेंगी हाहाकार ...

    hahahaha........ maza aa gaya

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  4. Majedaar..aisi bahut si ghatana ganv shahar me sunayi padati hai..
    par wakai aapki kavyatmak prstuti bahut majedaar hai...
    badhayi!!

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  5. अरे बाप रे इतना बुरा हाल। हा-हा-हा-हा

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  6. खूब ही मजेदार रचना करवा चौथ पर बाजा बजा दिया . बधाई .

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  7. बढ़िया है। बहू कह रही होगी- और करवा। वैसे हमने भी आज करवाचौथ की ही बखिया उधेड़ी है।

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  8. अब लाल लत्ते पहनेंगी तो चंडी ही तो लगेंगी श्रीमती जी...रंग बदलने पर विचार होना चाहिए

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  9. जीत गयी तू अबकी, मैं गयी हूँ हार ...
    अगली बार, लूंगी जब अवतार,
    सात पुश्तें तेरी, करेंगी हाहाकार ...


    ... और फिर इन देवियों ने बारी-बारी अवतार लेना शुरू कर दिया।

    बी एस पाबला

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  10. मजेदार ....करवा चौथ का हास्य उपहार ...
    देवी की आड़ में सारी भडास निकल गयी ..!!

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  11. भगवान न करे हाहाकार देखना पड़े।मस्त पोस्ट्।

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  12. badi zabardast devi chadhi theen....mann ki bhadaas nikalne ka achcha tareeka hai....
    sundar...

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  13. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  14. व्यंग्य के माध्यम से बड़ी गंभीर बात कह दी आपने..

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  15. हाहाकारी पोस्ट्! जय हो देवी मास्टरनी जी की।

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  16. बोली सास कराह कर
    लिखी भूमिका तूने इसकी
    मैं करूंगी उपसंहार
    जीत गयी तू अबकी, मैं गयी हूँ हार
    जी भर के करवा ले अपनी जय जैकार
    अगली बार, लूंगी जब अवतार,
    सात पुश्तें तेरी, करेंगी हाहाकार

    are baap re baap ab kya hoga ???
    saaton pushtein hahakaar karti hui paida hongi kya??
    ha ha ha ha

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  17. " और जोर से बजाओ थाली
    मुझमें आ गयी शेरोंवाली
    मैं ही काली, कलकत्ते वाली
    मेरा वार ना जाए खाली "
    Bhaut achhi rachana. Gaon kiya shahar mein bhi akshar dekha hai, yaad taji ho gayee. Samaj ko jagrook karne ka sarahaniya prayas. Badhai

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  18. हाथ - पैरों को ऐसे मरोड़ा
    देवर - जेठ का हाथ तोड़ा
    सास - ननद का पकड़ा झोंटा
    ससुर की पीठ पर जमाया सोटा
    चुप्पी साधे खड़ा था जो भी
    फ़ौरन चरणों पर जा लोटा


    jai maa kali kalkatte valii

    aapka javab nahi..laajavab

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