सोमवार, 30 जून 2014

मान जाओ

मान जाओ मानसून .... 

मान जाओ 
सुन लो 
मानसून 
अब आ भी जाओ । 

मत 
तरसाओ 
जल्दी से आओ 
सब तर कर जाओ । 

बरस 
बाद आए हो 
पाहुन 
बिन बरसे मत जाओ । 

यूँ  ही 
मत गुजरो  
तुम 
ज़ोर - ज़ोर से गरजो । 

मत लो 
हमसे बदला 
प्यारे - प्यारे 
तुम हो बदरा । 

सूख गई  
सारी धरती 
इस धरती को 
अब सुख सारे दे जाओ । 

प्यासी 
अँखियों को 
और न भटकाओ 
भर दो गागर 
भर दो सागर  
नदियों का 
सीना भर जाओ । 

सुनो  ! मान जाओ 
मानसून 
अब आ भी जाओ ।        [मास्टरनी ]






 





 








14 टिप्‍पणियां:

  1. मान जायेगा
    इतनी अच्छी
    तरह अगर
    कोई बुलायेगा ।

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  2. मान न कर सुन जल्दी से आजा मानसून,
    मान जा न soon ओ मानसून

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (01-07-2014) को ""चेहरे पर वक्त की खरोंच लिए" (चर्चा मंच 1661) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अच्छी खबरें आती है...तभी अच्छे दिन आते है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. मानसून में आदमियत आ गयी है, तभी तो इतनी पुकार और मनुहार का भी कोई असर नहीं पड़ रहा :)

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  6. कल 04/जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  7. आप इतने प्यार से बुला रही हैं अब तो आ ही जाएगा मानसून
    बहुत खूब शैफाली जी
    http://kaynatanusha.blogspot.in/2014/07/blog-post.html

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  8. आ भी जा रे मान सून। .
    सुन ले पुकार

    बढ़िया आवाहन

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  9. मानसून को मनाने का सुन्दर तरीका

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