रविवार, 9 अप्रैल 2017

वह सेल्फी नहीं लेती


वह इस इस दुनिया का जीता - जागता अजूबा है | आठवाँ आश्चर्य है | लोग पूछते हैं कहीं उसका दिमाग खराब तो नहीं हो गया ? सब मानते हैं कि वह अपनी सुध - बुध बिसरा बैठी है | न उसके पास रुपयों - पैसो की कमी है और न ही किसी और सुख सुविधा की | सबसे बढ़िया वाला कैमरा फोन है उसके पास | 

वह हर छुट्टियों में बाहर घूमने जाती है | नदी, पहाड़, पर्वत, समंदर, हरियाली के बीच भरपूर समय गुज़रती है, लेकिन कोई सेल्फी नहीं खींचती है | पेड़ - पौधे, फूल, पत्तियां, पर्वत, पहाड़, पत्थर रो - रोकर उससे प्रार्थना करते हैं कि '' हमारा ऐसा अपमान न करो | ले लो न हमारे साथ एक सेल्फी | तुम्हारा क्या जाएगा ? हाँ ! हमारा होना सार्थक हो जाएगा | 

फूल टसुए बहाते हैं - ''अगर हमारा इस तरह अपमान होगा तो हम खिलना छोड़ देंगे | इनसे अच्छे तो वे होते हैं जो आते हैं, हमें पकड़ते है, अपने मुंह के पास ले जाते हैं धकाधक फोटुएं उतारते हैं | हमें इतना नोच देते हैं कि कई - कई दिनों तक हमारी गर्दन ही सीधी नहीं हो पाती है ''|  
पेड़ आँसू टपकाते हैं,'' अगर तुमने हमें पेट से पकड़ कर या हमारी डाल पकड़ कर झूलती हुई सेल्फी न ली तो हम अभी के अभी गिर कर प्राण त्याग देंगे | 

नदियां सिर पटकती हैं उसके पैरों तले -'' अगर हम पर पैर डाले हुए या किसी पत्थर के ऊपर खड़े होकर तुमने एक सेल्फी नहीं ली तो हम बहना ही छोड़ देंगी | तुम्हें उन लोगों से कुछ सीखना चाहिए जो जान हथेली पर लेकर साथ सेल्फी खींचते हैं | मैं तो गवाह हूँ ऐसे कई शूरवीरों की ,जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी दे दी सेल्फी की खातिर, लेकिन मुझे नहीं छोड़ा |  

पहाड़ सिसकियाँ भरने लगते हैं '' अगर हम पर चढ़ कर तुमने सेल्फी न ली तो हम अभी के अभी दुःख से भरभरा कर गिर जाएंगे | सेल्फी के कई दीवाने मेरी गोद में सदा के लिए सो गए हैं लेकिन सेल्फी के ऐसे ही जांबाज़ प्रेमी मुझे बहुत पसंद आते हैं |''प्राण जाए पर सेल्फी न जाए''वाली कहावत मेरे दिल को छू जाती है |   

समुद्र हिचकियाँ भरता है,'' स्विम - सूट पहन कर घुटनों तक खड़े होकर तुमने अपनी एक भी सेल्फी नहीं ली तो किस काम का है मेरा इतना बड़ा होना | इससे तो अच्छा है कि मैं सूख जाऊं | सेल्फी के कितने ही आशिक मेरी गोद में सदा के लिए सो गए हैं, फिर भी मुझे आशिकों की कभी कमी नहीं रही | हर बार मेरे नए - नए आशिक बन जाते हैं | 

मेघों ने बरसने से इंकार कर दिया है -'' भीगने की एक भी सेल्फी नहीं ली तुमने, अब हम बरसकर करें भी तो क्या ''? धिक्कार है हम पर | लानत है ऐसी ज़िंदगी पर | 

पहाड़ों पर बर्फ ने पड़ने से इंकार कर दिया, '' तुमने मेरे साथ कोई सेल्फी नहीं ली | मुझे छूकर ही आनंद उठा ले रही हो | अपने तन पर महसूस कर रही ऐसे तो मेरा गल जाना ही ठीक है | अरे ! लोग तो मुझे देखते ही मुझ पर ऐसे टूट पड़ते थे जैसे कोई भूखा रोटी पर टूट पड़ता हो | मेरा आनंद महसूस करने के बजाय मेरे साथ सेल्फियाँ उतारते रहते थे | मैं कब गल जाती थी उन्हें पता ही नहीं चलता था | 

सूखा आहें भरता है, '' कितनी मुसीबतों से मैं आता हूँ, सबके लिए मुसीबत लाता हूँ और एक यह औरत है एक भी सेल्फी मेरे साथ नहीं लेती | नेता लोग तरसते हैं मेरे लिए, कितने काम आता हूँ मैं उनके | कितनी सुंदर सेल्फियां लेते हैं वे मेरे साथ | आहा ! मन भीग - भीग जाता है |  

लेकिन वह औरत बड़ी गज़ब की हस्ती है | उसका दिल किसी भी पुकार पर नहीं पसीजता | वह घूमने का भरपूर आनन्द लेती है | हर जगह को अपनी आँखों में कैद करती जाती है | हर बूँद को शरीर में, आत्मा में महसूस करती है |  
 
अजीब औरत है | सेल्फी स्टिक बेचने आने वाले को दूर से ही मना कर देती है | वह आश्चर्य से आँखें मलता रह जाता है पर वह परवाह नहीं करती | वह बड़बड़ाता चला जाता है '' न जाने कौन सी दुनिया से आई है ? हद है | सेल्फी स्टिक जैसी जीवनरक्षक आवश्यकता वाली चीज़ नहीं ले रही है | पुलिस को खबर कर देता हूँ जाने कौन ग्रह से आई है'' ?   

अच्छी - खासी है | सुन्दर है | दुबली - पतली है | आकर्षक मुस्कराहट है | उसका फेसबुक अकाउंट बिना प्रोफ़ाइल पिक्चर विहीन है | सेल्फी से इतनी दुश्मनी है कि व्हाट्सप पर अपनी डी पी तक नहीं बदलती है | जो एक बार लगा दी सो लगा दी | 

वह यदा - कदा नए कपडे भी खरीदती हुई पाई जाती है लेकिन ''कैसी लग रही हूँ दोस्तों'' कभी उसके मुंह से किसी ने नहीं सुना | कपड़े गुस्से में मुंह फुला लेते हैं '' लोग तो मांग - मांग कर भी हमें ले जाते हैं और नई - नई डी पी लगाते हैं और यह तो अपने ही कपड़ों का अपमान करती है इसकी अलमारी में रहने से अच्छा तो हम फट जाएं, हममें आग लग जाए या हमारी चोरी हो जाए''| 
 
वह दोस्तों के साथ रीयूनियन मे हमेशा शामिल होती है लेकिन सेल्फियां खिंचवाते समय कोई न कोई बहाना बनाकर अलग चली जाती है | दोस्त घमंडी, नकचढ़ी, कहती हैं लेकिन वह हंसती हुई टाल जाती है |  पुरानी दोस्तें उसको ज़्यादा भाव नहीं देती है | ''बहुत बदल गयी हो तुम'' सबकी जुबां पर आजकल एक ही वाक्य होता है | रीयूनियन वाले उसकी इन्हीं हरकत से तंग आकर उसे बुलाना भूलने लगे हैं | 
 
वह नित नए व्यंजन बनाती है | खाती है | खिलाती है | लेकिन भूले से भी कभी उसकी फोटो कभी अपलोड नहीं करती | उसकी रसोई उससे खफा हो जाती है '' क्यों बना रही हो हमें ? बाहर की दुनिया को तो मालूम ही नहीं होने दोगी हमारे बारे में | इससे अच्छा तो हम ख़राब हो जाएं | सड़ कर मर जाएं | हमारे ऊपर कॉकरोच कूद जाए | फफूंद चिपक जाए | 

वह सारे त्यौहार धूमधाम से मनाती है | समस्त रीति - रिवाज़ों का पालन करती है | पारम्परिक परिधान और आभूषण धारण करती है लेकिन कोई अगर सेल्फी भेजने के लिए कहता है तो गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाती है | लोगों का मानना है कि वह पूरी तरह से नास्तिक हो चुकी है तभी तो किसी भी त्यौहार की सेल्फी नहीं भेजती | त्यौहार भी आहें भरता है '' कितने सुकून के दिन हैं | मैं क्यों और कैसे मनाया जाता हूँ यह किसी को आजकल पता नहीं होता | पूरा त्यौहार सेल्फी लेकर और सेल्फी भेजकर ही मना डालते हैं लोग | ये मेरे आराम करने के दिन हैं | थैंक यू सेल्फी !

वह अपने पति, बच्चों से बेइंतहा प्यार करती है | पति के साथ बड़े ही सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध हैं | उनके जन्मदिन, अपनी वर्षगाँठ, को धूमधाम से मनाती है | दूर - दराज के परिचितों को सुबह - सवेरे ही फोन पर बधाई दे देती है | लेकिन सेल्फी खींचने के नाम से बैचैन हो जाती है | फोटुएं कुढ़ते हुए कहती हैं '' लोग घर के अंदर लड़ते हैं, झगड़ते हैं, मार - पीट करते हैं, बात - बात पर की  तलाक धमकी देते हैं लेकिन सिर्फ सेल्फी के लिए एक हुए रहते हैं कि तलाक ले लिया तो मुस्कुराती हुई सेल्फी कैसे खीचेंगे ? लाइक करने वाले भी क्या कहेंगे कि कल तक तो इतनी चिपका - चिपकी वाली फोटुएं लगाते थे और अब तलाक ले रहे हैं |    

बड़े - बड़े लोगों को देखकर भी अनदेखा कर देती है | उनके बाजू में लपककर नहीं जाती | प्रसिद्द लोगों से मुलाक़ात होने पर उनके साथ 'एक सेल्फी हो जाए' कहकर जबरन गले भी नहीं पड़ती है | बड़े लोग परेशान हो जाते हैं '' कैसी महिला है यह ? हमारे साथ फोटो खिंचाने के लिए लोग पागल हो रहे हैं, एक यह है कि हमारी तरफ नज़र उठाकर भी नहीं देख रही है | आज हमारा सेलिब्रिटी होना अकारथ चला गया'' | वे अपने गले में पडी हुई मालाएं नोचने लगते हैं | अजीब औरत को कोई फर्क नहीं पड़ता |  

वह सबके शादी - ब्याह में भी शामिल होती है | किसी ने उसे आज तक स्टेज पर नहीं चढ़कर फोटो खिंचवाते नहीं देखा | शादी की सारी रस्मों का आनंद उठाती है | रिश्तेदारों से मिलती है | बुजुर्गों के हाल पूछती है | अपने हाल बताती है | सबके बच्चो की खैरियत लेती है | भोजन का भरपूर आनद उठाती है | लोग सेल्फी के लिए पुकारते रह जाते हैं लेकिन वह ''अभी आती हूँ '' कहकर वहां से नौ दो ग्यारह जाती है  

वह अपने घर में आए हुए अतिथि को पानी पिलाती है, खाना खिलाती है, स्वागत -सत्कार में कोई कोर - कसर नहीं छोड़ती है | मेहमान मुँह बिचकाते हैं,'' पागल तो नहीं हो गयी है यह ? आजकल तो लोग घर जाने पर पानी को भी नहीं पूछते बस दनादन सिर से सिर चिपकाकर सेल्फियां उतारते जाते हैं, और यह है कि इतना स्वागत किये दे रही है, कहीं बदहज़मी न हो जाए'' | 

वह पुस्तक प्रेमी है लेकिन कभी किसी पुस्तक के साथ उसकी फोटो किसी ने नहीं देखी | पुस्तक परेशान हो उठती है उसके शब्द बाहर निकलने को आतुर हो जाते है '' प्लीस हमारे साथ एक सेल्फी तो ले लो | हम तो ऐसे - ऐसे लोगों के हाथों में रही हैं जो पहला पन्ना खोलते ही सेल्फियां लेने जुट जाते थे और सिद्ध करते थे कि इस दुनिया में सबसे ज़्यादा साहित्य प्रेमी वही हैं | सेल्फी लेने के बाद हमसे ऐसे मुंह मोड़ लेते हैं  जैसे नेता चुनाव जीतने के बाद जनता से मोड़ता है | उस अलमारी में सजा देते थे जहाँ मेरी जैसी कई साहित्यिक किताबें बरसों से धूल फांक रही होती हैं ''|   

समाज सेवा उसका शौक है | खाली समय में अपने मोहल्ले के और झुग्गी - झोंपड़ी के बच्चो को पढ़ाती है | साल में एक बार अपने पुराने स्वेटर, कपडे इत्यादि दान करती है | शहर के धनाढ्य लोगों से उसने संपर्क बना रखे हैं जो उसे समाज सेवा के कार्यों में सहायता प्रदान करते हैं | आजकल ये पैसेवाले लोग उससे अप्रसन्न रहने लगे हैं क्योंकि वह यह काम उनके साथ बिना सेल्फी लिए करती है |  

रास्ते में कोई घायल पड़ा हुआ हो, मदद मांग रहा हो, किसी की तबीयत अचानक खराब गयी हो, एक्सीडेंट हुआ हो, चोट लग गयी हो तो ऐसे में वह सेल्फी नहीं खींचती है बल्कि उनकी मदद करने लग जाती है | एम्बुलेंस बुलवाती है, लोगों की गाड़ियां रुकवाती है, अपने पास जो कुछ भी होता है, फ़ौरन मदद करने में जुट जाती है | घायल इंसान हाथ जोड़ता रह जाता है ,'' बहनजी मेरे मरने की परवाह मत करिये | यह तो शरीर है, आज नहीं तो कल इसे नष्ट होना ही है | सेल्फियां अजर - अमर हैं |  आप अपना फोन निकाल कर पहले मेरे साथ सेल्फी ले लीजिये | मेरे भाग्य में बचना होगा तो बच ही जाऊंगा लेकिन उसका दिल बिलकुल नहीं पसीजता | वह पूरी ताकत लगा देती है उसे बचाने में | 

डॉक्टर उसके ऊपर शोध कर रहे हैं | उससे चिढ़ने वाले उसे देशद्रोही करार दे रहे हैं | पड़ोसी उसे पसंद नहीं करते | दोस्तों ने दूरी बना ली है | लेकिन वह अपनी दुनिया में मस्त है, जिसमे न सेल्फी है, न टेढ़े - मेढ़े  मुँह हैं और न जबरदस्ती हंसने - मुस्कुराने की शर्त है |    
 

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह जी, बहुत बढ़िया। सेल्फी बिन जीवन भी क्या जीवन!

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन परमवीर - धन सिंह थापा और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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